Global Debt : इस देश पर है सबसे ज्यादा कर्ज, जानें किस नंबर पर आता है भारत?

punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 06:28 PM (IST)

नेशनल डेस्क: दुनिया भर में सरकारी कर्ज अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। जनवरी 2026 के आंकड़ों और आर्थिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारी कर्ज के बोझ तले दबी हुई हैं। कहीं युद्ध की वजह से खर्च बढ़ा है, तो कहीं बढ़ती आबादी, कल्याणकारी योजनाएं और लंबे समय से चल रहा राजकोषीय घाटा चिंता का कारण बना हुआ है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि दुनिया में सबसे ज्यादा कर्ज किस देश पर है और इस सूची में भारत की स्थिति क्या है।

सबसे ज्यादा कर्ज वाला देश कौन?

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) दुनिया का सबसे ज्यादा कर्जदार देश बना हुआ है। अमेरिका पर कुल सरकारी कर्ज करीब 38.3 ट्रिलियन डॉलर है। यह दुनिया के कुल सार्वजनिक कर्ज का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका की रिजर्व करेंसी (डॉलर) की स्थिति, भारी सैन्य खर्च, सामाजिक कल्याण योजनाएं और बार-बार होने वाले बजट घाटे इसकी बड़ी वजह हैं। इसी कारण अमेरिका लगातार बड़े पैमाने पर कर्ज लेता रहा है।

चीन, जापान और यूरोप की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं

अमेरिका के बाद चीन दूसरे नंबर पर है। चीन पर कुल सरकारी कर्ज करीब 18.7 ट्रिलियन डॉलर है। यह कर्ज बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, स्थानीय सरकारों के उधार और आर्थिक प्रोत्साहन योजनाओं की वजह से बढ़ा है। जापान करीब 9.8 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद

  • यूनाइटेड किंगडम – लगभग 4.1 ट्रिलियन डॉलर
  • फ्रांस – करीब 3.9 ट्रिलियन डॉलर
  • इटली – लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर

भारत की क्या है स्थिति?

कुल सरकारी कर्ज के मामले में भारत सातवें स्थान पर है। भारत का कुल सरकारी कर्ज और देनदारियां लगभग 3.8 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ कुल कर्ज से असली स्थिति साफ नहीं होती। किसी देश की कर्ज की हालत समझने के लिए कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को ज्यादा अहम माना जाता है।

कर्ज-से-जीडीपी अनुपात में हालात

कर्ज-से-जीडीपी अनुपात के हिसाब से सूडान सबसे ज्यादा संकट में है, जहां यह अनुपात 221% से 252% के बीच है। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में जापान का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 237% है, जो काफी ऊंचा माना जाता है।

कर्ज-से-जीडीपी में भारत कहां खड़ा?

भारत का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 81.9% है। इस आधार पर भारत दुनिया में लगभग 31वें से 35वें स्थान के बीच आता है। सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक इस अनुपात को घटाकर करीब 50% तक लाया जाए। भारत की एक बड़ी मजबूती यह है कि उसका 95% से ज्यादा कर्ज घरेलू स्रोतों से लिया गया है। इससे विदेशी मुद्रा और बाहरी भुगतान से जुड़े जोखिम काफी कम हो जाते हैं। भारत के कुल कर्ज में बाहरी कर्ज 5% से भी कम है।


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News Editor

Parveen Kumar

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