Chandra Grahana 2026 : ग्रहण और सूतक काल को दौरान भूख लगने पर क्या करना चाहिए? जाने क्या कहते हैं शास्त्र
punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 04:34 PM (IST)
नेशनल डेस्क : पंचांग के अनुसार 3 मार्च 2026 को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक रहेगा। चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, इसलिए सुबह 6:20 बजे से ही सूतक प्रभावी माना गया है। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण का समय विशेष महत्व रखता है और इसे सावधानी बरतने का काल माना जाता है।
सूतक काल में भोजन को लेकर मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक और ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इस कारण सामान्य लोगों के लिए इस समय भोजन पकाना और खाना उचित नहीं माना जाता। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के प्रभाव से पका हुआ भोजन जल्दी दूषित हो सकता है, इसलिए इसे ग्रहण से पहले सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है।
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अगर भूख लगे तो क्या करें?
शास्त्रों में कुछ परिस्थितियों में छूट का उल्लेख भी मिलता है।
1. किन्हें छूट है?
बच्चे, बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति और गर्भवती महिलाओं को कठोर नियमों से छूट दी गई है। जरूरत पड़ने पर वे हल्का और सात्विक भोजन ले सकते हैं।
2. पहले से बना भोजन
यदि बहुत अधिक भूख लगे, तो ग्रहण से पहले तैयार भोजन में तुलसी के पत्ते डालकर सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। तुलसी को भोजन की शुद्धता बनाए रखने वाला माना गया है।
3. फल और सूखे मेवे
फल, सूखे मेवे और दूध जैसे सात्विक आहार ग्रहण के दौरान लिए जा सकते हैं, क्योंकि इन्हें हल्का और पवित्र माना जाता है।
4. पानी और पेय पदार्थ
प्यास लगने पर तुलसी मिला हुआ पानी या पहले से रखा जूस लिया जा सकता है।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?
- ग्रहण से पहले बने भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें।
- सूतक काल में नया भोजन न पकाएं।
- मंत्र जाप और भगवान का ध्यान करें।
- नुकीली वस्तुओं जैसे चाकू या सुई का प्रयोग न करें।
- ग्रहण के समय सोने से बचें (बीमार व्यक्ति अपवाद हैं)।
- घर के मंदिर के पट बंद रखें।
- बिना सुरक्षा के सीधे ग्रहण न देखें।
ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद ताजा भोजन बनाकर ग्रहण करें। यदि पहले से बना भोजन तुलसी के बिना रखा हो, तो उसे मनुष्य के लिए उपयोग न करें; उसे पशुओं को दिया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नियमों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और जीवन में शुभता आती है।
