What is turbulence: 300 फीट नीचे आया Air India का विमान... क्या टर्बुलेंस से सच में गिर सकता है प्लेन? कितना रहता है खतरा, जानें
punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 04:49 PM (IST)
नई दिल्ली: फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ़्लाइट को मंगलवार को रास्ते में टर्बुलेंस (हवा के तेज़ झोंकों) का सामना करना पड़ा, जिससे विमान की ऊंचाई अचानक और कुछ देर के लिए कम हो गई। यह घटना फ़्लाइट AI2379 में हुई, जिसमें क्रू के कंट्रोल वापस पाने से पहले विमान लगभग 300 फीट नीचे गिर गया। हालांकि, टर्बुलेंस के दौरान कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं।
वहीं, एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में आए टर्बुलेंस ने एक बार फिर यात्रियों के बीच उड़ान के दौरान होने वाली इस आम लेकिन अक्सर गलत समझी जाने वाली घटना पर चर्चा शुरू कर दी है। जैसे कि क्या टर्बुलेंस का मतलब है कि विमान असुरक्षित है? क्या इससे विमान दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है? और मानसून के दौरान यह ज्यादा क्यों महसूस होता है? आइए समझते हैं....
इन-फ्लाइट टर्बुलेंस क्या होता है?
टर्बुलेंस का मतलब हवा की अनियमित और अस्थिर गति से है, जिसके कारण विमान में झटके महसूस होते हैं या कह सकते है कि उसकी ऊंचाई में अचानक बदलाव आ सकता है। इसे आसान भाषा में समझें तो यह वैसा ही है जैसे कार ऊबड़-खाबड़ सड़क या स्पीड ब्रेकर से गुजरती है। विमान हवा के ऐसे हिस्से से गुजर रहा होता है जहां हवा का प्रवाह स्थिर नहीं होता।

यात्रियों को भले ही तेज झटके महसूस हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि विमान आसमान से गिर रहा है। आधुनिक कमर्शियल विमान इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे सामान्य से कहीं ज्यादा मजबूत हवा के दबाव और झटकों को सहन कर सकें।
टर्बुलेंस क्यों होता है?
टर्बुलेंस कई कारणों से हो सकता है और हर उड़ान में इसका अनुभव अलग हो सकता है।
1. माउंटेन वेव टर्बुलेंस
जब तेज हवाएं पहाड़ों की High mountain ranges जैसे हिमालय, से टकराती हैं तो हवा की लहरें बन सकती हैं। ये लहरें काफी ऊंचाई तक फैल सकती हैं और इनके क्षेत्र से गुजरने वाले विमानों को मध्यम से तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ सकता है।
2. क्लियर-एयर टर्बुलेंस
क्लियर-एयर टर्बुलेंस सबसे अप्रत्याशित प्रकारों में से एक माना जाता है क्योंकि यह बिना बादलों या तूफान के भी हो सकता है। यह आमतौर पर जेट स्ट्रीम वाले इलाकों में हवा की गति और दिशा में अचानक बदलाव के कारण बनता है। चूंकि इसमें कोई दिखाई देने वाला बादल नहीं होता, इसलिए मौसम रडार इसे पहले से पकड़ नहीं पाता। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में इस तरह के टर्बुलेंस की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
3. थंडरस्टॉर्म या कन्वेक्टिव टर्बुलेंस
यह टर्बुलेंस का सबसे आम प्रकार है, खासकर मानसून के मौसम में। जब गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है, तो वातावरण में तेज ऊर्ध्वाधर हवा का प्रवाह बनता है। गरज-चमक वाले बादल, भारी बारिश या तूफानी मौसम से गुजरने पर विमान को इस तरह का टर्बुलेंस महसूस हो सकता है।
4. वेक टर्बुलेंस
हर उड़ते हुए विमान के पीछे पंखों से घूमती हुई हवा की एक लहर बनती है, जिसे वेक टर्बुलेंस कहा जाता है। अगर कोई दूसरा विमान बहुत करीब से इस क्षेत्र से गुजरता है तो वह प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से एयर ट्रैफिक कंट्रोलर विमानों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखते हैं।
क्या टर्बुलेंस आने पर विमान नीचे गिर सकता है?
यह यात्रियों का सबसे बड़ा डर होता है, लेकिन इसका जवाब लगभग हमेशा 'नहीं' है। कमर्शियल विमान बेहद मजबूत बनाए जाते हैं और वे टर्बुलेंस से पैदा होने वाली ताकतों से कहीं अधिक दबाव सहन करने में सक्षम होते हैं। पायलटों को उड़ान से पहले और यात्रा के दौरान मौसम की लगातार जानकारी मिलती रहती है। जरूरत पड़ने पर पायलट खराब मौसम वाले एरिया से बचने के लिए ऊंचाई बदल सकते हैं या विमान का रास्ता बदल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल टर्बुलेंस की वजह से विमान दुर्घटना होना बेहद दुर्लभ है। हालांकि, केबिन के अंदर यात्रियों को चोट लगने का खतरा हो सकता है।
सीट बेल्ट पहनना क्यों जरूरी है?
टर्बुलेंस से जुड़ी ज्यादातर चोटें विमान को नुकसान पहुंचने से नहीं, बल्कि यात्रियों के केबिन के अंदर गिरने या टकराने से होती हैं।
चोट का खतरा ज्यादा हो सकता है अगर यात्री...
-सीट पर न बैठे हों और गलियारे में चल रहे हों
-टॉयलेट के पास खड़े हों
-सीट बेल्ट न पहने हों
-ढीले सामान से टकरा जाएं
इसी कारण एयरलाइंस सलाह देती हैं कि यात्री पूरी उड़ान के दौरान सीट बेल्ट हल्के से बांधे रखें, भले ही सीट बेल्ट साइन बंद हो।
अगर उड़ान के दौरान टर्बुलेंस आए तो क्या करें?
-घबराने के बजाय शांत रहने की कोशिश करें
-तुरंत सीट बेल्ट बांध लें
-केबिन क्रू के निर्देशों का पालन करें
-बिना जरूरत सीट से न उठें
-अपना सामान सुरक्षित रखें
-बच्चों की सीट बेल्ट अच्छी तरह बांधी हुई सुनिश्चित करें
सबसे जरूरी बात यह है कि पायलट और क्रू ऐसे हालात से निपटने के लिए ट्रेनंड होते हैं। टर्बुलेंस डरावना महसूस हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह उड़ान का एक सामान्य हिस्सा होता है।
