MCD चुनाव में क्या है दिल्ली की जनता का मूड़, किसे चुनेगी जनता?

punjabkesari.in Saturday, Dec 03, 2022 - 08:07 PM (IST)

नेशनल डेस्कः राजधानी दिल्ली में रविवार यानी 4 दिसंबर को नगर निगम के लिए मतदान होगा। एमसीडी चुनाव के लिए शुक्रवार को प्रचार थम गया। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। एमसीडी चुनाव में 1.45 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए योग्य हैं। चुनाव में कुल 1,349 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान सुबह आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक होगा और मतगणना सात दिसंबर को होगी। दिल्ली में मतदाताओं की कुल संख्या 1,45,05,358 है, जिसमें 78,93,418 पुरुष, 66,10,879 महिलाएं और 1,061 ट्रांसजेंडर हैं।

दिल्ली में आप-भाजपा की सीधी टक्कर
दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें और लोकसभा की 7 सीट आती हैं। इसमें दिलचस्प बात ये है कि दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 62 सीटों पर AAP के विधायक हैं और 8 सीटें भाजपा के पास है। कांग्रेस को लोगों ने नकार दिया है। उधर, लोकसभा की सभी सीटें भाजपा के पास हैं। दिल्ली में एमसीडी का चुनाव इसबार त्रिकोणीय माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी और भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झौंक दी है। चुनाव से पहले दिल्ली में ‘आप' और भाजपा के बड़े नेताओं ने प्रचार किया और गलियों में घूम कर अपनी पार्टी के उम्मीदवार के लिए वोट मांगे।  ‘आप' और भाजपा दोनों ने विश्वास जताया है कि वे चुनावों में विजयी होंगी, जबकि कांग्रेस खोया हुआ अपना जनाधार हासिल करने की कोशिश कर रही है।

आप ने किए बड़े वादे
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कुतुबमीनार से भी ऊंचे बने कूड़े के पहाड़ों, एमसीडी में भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दे उठाए हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि दिल्ली की जनता एमसीडी में आप को एक मौका दे, हम 5 साल में कूड़े के गगनचुंबी पहाड़ों को खत्म कर देंगे। एमसीडी से भ्रष्टाचार को खत्म कर देंगे, जैसे दिल्ली सरकार से खत्म किया है। AAP ने स्थानीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है और भाजपा पर जनकर निशाना साधा है। केजरीवाल एंड आप पार्टी भाजपा से 15 सालों का हिसाब मांगा है।

क्या है दिल्ली की जनता का मूड
हालांकि, दिल्ली की जनता इसके बिल्कुल अलग सोचती है। जनता मानती है कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने कोई काम नहीं किया। फ्री बिजली, मोहल्ला क्लीनकि और महिलाओं को मुफ्त यात्रा के बहाने केजरीवाल ने लोगों को ठगने का काम किया है। स्थानीय लोगों में भाजपा के खिलाफ भी रोष है लेकिन लोग केजरीवाल और उनके विधायकों से ज्यादा नाराज हैं। लोगों का मानना है कि केजरीवाल ने आठ साल में कोई विकास कार्य नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ ‘फ्री’ की राजनीति की है। लोग मानते हैं कि पहले बिजली ‘फ्री’ थी लेकिन अब बिल आ रहे हैं। दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों मे पानी की समस्या बहुत है।

लोग ये भी बताते हैं कि दिल्ली में गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत बहुत हो जाती है। घरों में गंदा पानी आता है। दिल्ली मे प्रदूषण बहुत है। लोगों ने केजरीवाल पर आरोप लगाया कि पहले पंजाब में दूसरी पार्टी की सरकार होती थी तो आरोप लगाते थे कि पंजाब की सरकार हमारा सहयोग नहीं कर रही। किसानों को पराली जलाने से नहीं रोक रही। लेकिन अब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है तो प्रदूषण कम करने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए। लोगों ने यमुना के प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया है। बता दें कि केजरीवाल ने 2015 में दावा किया था कि पांच साल में यमुना को साफ कर देंगे। दिल्ली की जनता ने कहा कि केजरीवाल ने सिर्फ जनता को ठगा है और कुछ नहीं किया।

वहीं, एक वर्ग का मानना है कि भाजपा ने 15 सालों में एमसीडी में कोई विकास नहीं किया। सिर्फ वादे किए लेकिन कुछ किया नहीं। दिल्ली की जनता की मानें तो एमसीडी में भ्रष्टाचार है। लोगों को काम कराने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है। भाजपा के पार्षद काम नहीं करते हैं। लोग कहते हैं कि भाजपा ने 15 सालों में सिर्फ कूड़े के पहाड़ बनाए हैं। दिल्ली में जगह-जगह कूड़े के ढेर बने हुए हैं। साफ-सफाई नहीं है। गलियां और नाले कूड़े से भरे हुए हैं। लोग कहते हैं कि भाजपा सिर्फ बड़े-बड़े सपने दिखाती है। काम नहीं करती।

भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
दिल्ली एमसीडी में भाजपा 15 सालों से सत्ता में है। पहले तीन नगर निगमों में भाजपा के मेयर थे। साल 2017 में हुए निकाय चुनाव में भाजपा ने कुल 270 वार्ड में से 181 में जीत हासिल की थी। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती एमसीडी का किला बचाने की है। भाजपा ने जहां झुक्की, वहीं मकान देने का वादा किया है। एमसीडी में लाइसेंस सेवा को ऑनलाइन करने समेत कई बड़े वादे किए हैं। लेकिन अब देखना होगा कि इस बार एमसीडी में कौन बाजी मारता है। 7 दिसंबर को चुनाव के नतीजे सामने आएंगे।

कब हुआ एमसीडी का गठन?
एमसीडी को 1958 में स्थापित किया गया था। 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान इसे तीन हिस्सों- उत्तर, दक्षिण और पूर्वी दिल्ली नगर निगमों में बांट दिया गया था। हालांकि, इस साल फिर से तीनों को एकीकृत कर दिया गया। परिसीसन होने के बाद और उत्तर, दक्षिण और पूर्वी दिल्ली नगर निगमों को मिलाकर एकीकृत एमसीडी बनाने के बाद यह पहला चुनाव है। एकीकृत एमसीडी 22 मई से अस्तित्व में आई है। रविवार को होने वाला मतदान गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के मतदान से तीन दिन बाद और दूसरे चरण के मतदान से एक दिन पहले हो रहा है।


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Content Writer

Yaspal

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