Sonam Wangchuk के आंदोलन में आया नया मोड़: संसद मार्च से पहले किया बड़ा ऐलान, रखीं ये 3 शर्तें

punjabkesari.in Monday, Jul 20, 2026 - 09:22 AM (IST)

Sonam Wangchuk Big announcement : दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के आंदोलन में एक नया मोड़ आ गया है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत यानि कि 20 जुलाई के ठीक पहले, वांगचुक ने अस्पताल के बेड से ही देश के संसद सदस्यों (सांसदों) को एक भावुक और रणनीतिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने हाल ही में देश में हुए पेपर लीक जैसी बड़ी गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए अपना अनशन (भूख हड़ताल) खत्म करने का एक नया प्रस्ताव रखा है। दूसरी तरफ उन्हें किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की उनकी पत्नी की याचिका को हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी है।

अनशन खत्म करने के लिए रखीं ये 3 मुख्य शर्तें 

सफदरजंग अस्पताल में कड़े पहरे के बीच लिखे गए इस पत्र में सोनम वांगचुक ने साफ किया है कि वे अपना अनशन वापस ले लेंगे, बशर्ते देश के जनप्रतिनिधि (सांसद) उनकी इन तीन शर्तों को पूरा करने का लिखित या मौखिक आश्वासन दें। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने रविवार को कहा कि उनकी भूख हड़ताल प्रस्तावित "संसद चलो" मार्च के बाद भी जारी रहेगी और इसे तभी खत्म किया जाएगा जब सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया नाकामियों की ज़िम्मेदारी ले या राजनीतिक नेता उन्हें भरोसा दिलाएं कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक हाथ से लिखे नोट में वांगचुक ने कहा, आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना उपवास कब खत्म करूंगा।

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जैसा कि मैंने पहले समर्थकों से कहा था मैं 20 जुलाई को अपना उपवास खत्म करूंगा... अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया नाकामियों, पेपर लीक वगैरह की ज़िम्मेदारी लेती है। एक्टिविस्ट ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनका उपवास जारी रहेगा। नोट में कहा गया, मेरी सेहत कैसी भी हो, 'संसद चलो' मार्च के बाद भी मेरा उपवास जारी रहेगा और इसे सिर्फ इन हालात में ही खत्म किया जाएगा। वांगचुक ने कहा कि वह अपना उपवास तब भी खत्म करेंगे अगर CJP की लीडरशिप और मैं संसद के दरवाज़े तक पहुंचते हैं जहां सम्मानित सांसद और अलग-अलग पार्टियों के नेता हमें भरोसा दिलाएं कि वे अब संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे। 

 

 

उनके नोट में लिखा था, अगर मेरी सेहत या दूसरी वजहों से ऐसा मुमकिन नहीं हो पाता है तो सम्मानित सांसद और अलग-अलग पार्टियों के नेता इस अस्पताल में आकर ऊपर बताया गया भरोसा दिलाएं। वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी तौर पर हिरासत में रखा गया है। वांगचुक ने कहा कि वह अपना उपवास तब भी खत्म करेंगे अगर CJP की लीडरशिप और मैं संसद के दरवाज़े तक पहुंचते हैं जहां सम्मानित सांसद और अलग-अलग पार्टियों के नेता हमें भरोसा दिलाएं कि वे अब संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे। 

उनके नोट में लिखा था, अगर मेरी सेहत या दूसरी वजहों से ऐसा मुमकिन नहीं हो पाता है तो सम्मानित सांसद और अलग-अलग पार्टियों के नेता इस अस्पताल में आकर ऊपर बताया गया भरोसा दिलाएं। वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी तौर पर हिरासत में रखा गया है। 

उन्होंने कहा, सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी हिरासत से जहां मेरे आने-जाने, बोलने और बातचीत करने की आज़ादी पर रोक लगी हुई है। शनिवार को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा था कि अगर राजनीतिक नेता अस्पताल में उनसे मिलें और उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे संसद के मॉनसून सत्र के दौरान शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे तो वह अपना उपवास खत्म कर देंगे।

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आंग्मो ने "संसद चलो" मार्च में शामिल हो रहे समर्थकों से वांगचुक की अपील भी पहुंचाई कि वे शांति बनाए रखें और यह पक्का करें कि विरोध प्रदर्शन का गलत इस्तेमाल न हो। बता दें कि वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और 28 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। वहीं CJP के प्रदर्शनकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों (जैसे पेपर लीक) के बाद शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

बता दें कि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक आपातकालीन याचिका दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि सरकारी सफदरजंग अस्पताल के बजाय वांगचुक को किसी निजी (प्राइवेट) अस्पताल में ट्रांसफर करने की इजाजत दी जाए जहां परिवार उनके स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी कर सके। हालांकि अदालत ने मौजूदा व्यवस्था को सही मानते हुए इस मांग पर तत्काल कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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