Indian Railways News: रेलवे ने किया बड़ा बदलाव: अब यात्रियों को ट्रेनों में आसानी से मिलेगी कंफर्म सीट

punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 12:26 PM (IST)

नेशनल डेस्क: Indian Railways ने अपने खजाने को भरने और यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए एक बड़ा नीतिगत प्रहार किया है। अब राजधानी, दुरंतो और अन्य प्रीमियम ट्रेनों के 'फर्स्ट एसी' और 'सेकंड एसी' कोचों में ऑन-बोर्ड स्टाफ (अटेंडेंट और मेंटेनेंस कर्मी) का कब्जा खत्म होने जा रहा है। रेलवे बोर्ड ने एक क्रांतिकारी फैसला लेते हुए ऑन-बोर्ड कर्मचारियों को मिलने वाली आरक्षित सीटों के कोटे में भारी कटौती कर दी है। इस कदम का सीधा मकसद उन कीमती सीटों को यात्रियों के लिए खोलना है, जो अब तक स्टाफ के नाम पर 'ब्लॉक' रहती थीं।

वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी
नए नियमों के लागू होने के बाद अब एसी फर्स्ट और एसी सेकंड क्लास में स्टाफ के लिए एक भी सीट आरक्षित नहीं रखी जाएगी। अभी तक इन श्रेणियों की महंगी सीटें मेंटेनेंस और हाउसकीपिंग स्टाफ के पास रहती थीं, जिससे Railways को सीधे तौर पर किराए का नुकसान होता था। अब ये सीटें 'passenger system' में शामिल कर दी गई हैं, जिससे वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। रेलवे का अनुमान है कि हर ट्रेन में औसतन 4 से 6 सीटें खाली होने से प्रतिदिन लाखों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

पुराने नियम रद्द: अब 3rd AC और Sleeper में सिमटेगा Staff

Railways बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग) संजय मनोचा द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, साल 2016 और 2018 के पुराने सभी सर्कुलर रद्द कर दिए गए हैं। अब नई व्यवस्था के तहत:

राजधानी/दुरंतो: इनमें तैनात स्टाफ को अब केवल 3rd AC में अधिकतम 2 बर्थ दी जाएंगी।

स्लीपर ट्रेनें: इन ट्रेनों के स्टाफ को अनिवार्य रूप से केवल sleeper class में ही जगह मिलेगी।

सफाई कर्मचारी (OBHS): हाउसकीपिंग स्टाफ के लिए 'spread model' लागू किया गया है, जिसके तहत उन्हें 3rd AC या Sleeper में केवल साइड लोअर की कुल 4 सीटें दी जाएंगी।

पेंट्री कार और वेंडिंग स्टाफ के लिए 'no entry'
रेलवे ने वेंडिंग स्टाफ को लेकर भी कड़े रुख अपनाए हैं। जिन ट्रेनों में पेंट्री कार की सुविधा मौजूद है, वहां वेंडिंग स्टाफ को यात्री कोच के भीतर एक भी सीट नहीं दी जाएगी; उन्हें अपनी पूरी ड्यूटी पेंट्री कार के भीतर ही बितानी होगी। वहीं, जिन ट्रेनों में पेंट्री कार नहीं है, वहां उनके लिए केवल 2 सीटों का प्रावधान किया गया है।

राजस्व की चपत और सीटों के दुरुपयोग पर लगाम
अक्सर यह शिकायतें मिलती थीं कि स्टाफ के नाम पर आरक्षित सीटों का दुरुपयोग होता है या वहां अनाधिकृत लोग यात्रा करते हैं। इस नई नीति से न केवल वित्तीय चपत रुकेगी, बल्कि रेलवे की कार्यक्षमता (Operational Efficiency) में भी सुधार होगा। यह बदलाव 'पैसेंजर फ्रेंडली' होने के साथ-साथ रेलवे के कमर्शियल मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Anu Malhotra

Related News