ट्रंप के टैरिफ पर संसद में चर्चा: विदेश सचिव ने कहा– भारत के हित सुरक्षित
punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 09:53 PM (IST)
नेशनल डेस्क: विदेश मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की बैठक सोमवार को आयोजित हुई, जिसमें Vikram Misri ने विदेश मंत्रालय की ओर से सांसदों को विस्तृत जानकारी दी। बैठक का औपचारिक एजेंडा मंत्रालय की अनुदान मांगों की समीक्षा था, लेकिन चर्चा का केंद्र अमेरिका की बदलती टैरिफ नीति और उसके भारत पर संभावित प्रभाव रहे। समिति की अध्यक्षता Shashi Tharoor कर रहे थे।
ट्रंप की घोषणाओं पर सांसदों की चिंता
बैठक के दौरान कई सदस्यों ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा हाल में घोषित टैरिफ दरों में बदलाव और उनके उतार-चढ़ाव को लेकर सवाल उठाए। सांसदों ने पूछा कि क्या इन फैसलों से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, विदेश सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में चल रही टैरिफ बहस से भारत को तत्काल कोई गंभीर चुनौती नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत के सभी व्यापारिक निर्णय व्यापक विचार-विमर्श और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता में रखकर लिए जाते हैं।
अमेरिकी टैरिफ पर हालिया घटनाक्रम
हाल में Supreme Court of the United States ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कुछ व्यापक टैरिफ को अवैध ठहराया था। इसके बाद ट्रंप ने पहले 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की, जिसे बाद में 15 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया।
यह कदम 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत उठाया गया है, जिसके अनुसार ऐसा टैरिफ अधिकतम 150 दिनों तक ही प्रभावी रह सकता है। आगे इसे जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।
भारत पर असर कितना?
बताया गया कि इन बदलावों के बावजूद भारत पर लागू अमेरिकी टैरिफ दर लगभग 18 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। इसे हालिया भारत-अमेरिका व्यापार व्यवस्था के अनुरूप माना जा रहा है। सरकार का पक्ष है कि वर्तमान स्थिति भारत के लिए संतुलित है और इससे कोई नया व्यापारिक संकट उत्पन्न नहीं हुआ है। विपक्षी दलों ने हालांकि इस विषय पर पारदर्शिता और दीर्घकालिक रणनीति को लेकर सवाल उठाए।
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
विदेश सचिव ने समिति को आश्वस्त किया कि भारत अपनी व्यापार नीति में लचीलापन बनाए रखेगा, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा, किसानों के हित और आर्थिक संप्रभुता जैसे मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका भारत को एक प्रमुख लोकतांत्रिक साझेदार के रूप में देखता है और द्विपक्षीय संबंध स्थिर और दीर्घकालिक आधार पर आगे बढ़ रहे हैं।
