Twisha Sharma की सास गिरिबाला सिंह को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने कहा- कोई भी कानून से ऊपर नहीं
punjabkesari.in Thursday, May 28, 2026 - 08:39 AM (IST)
Twisha Sharma: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व ज़िला जज गिरिबाला सिंह को उनकी बहू, Twisha Sharma की दहेज से जुड़ी मौत के मामले में दी गई अग्रिम ज़मानत रद्द कर दी है। बुधवार को दिए गए इस आदेश में, निचली अदालत द्वारा 15 मई के आदेश के ज़रिए पहले दी गई राहत को रद्द कर दिया गया। कोर्ट ने पाया कि ज़मानत देने से पहले केस डायरी और गवाहों के बयानों से जुड़े अहम तथ्यों पर ठीक से विचार नहीं किया गया था। जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने भोपाल की एक सत्र अदालत द्वारा पहले दी गई अग्रिम ज़मानत को रद्द कर दिया। उन्होंने पाया कि निचली अदालत केस डायरी, गवाहों की गवाही और WhatsApp बातचीत जैसे अहम सबूतों की ठीक से जांच करने में नाकाम रही।
हाई कोर्ट ने मामले की समीक्षा करने के बाद पाया कि आदेश में गंभीर कमियां थीं। बेंच ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी में मौजूद गवाहों की अहम गवाही और दस्तावेज़ी सबूतों को नज़रअंदाज़ कर दिया था, जो सिंह की कथित संलिप्तता की ओर इशारा करते थे। हाई कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अग्रिम ज़मानत तभी दी जानी चाहिए जब सभी तथ्यों की पूरी और सावधानी से जांच कर ली जाए, खासकर तब जब आरोप दहेज से जुड़ी मौत के हों -- जो एक गंभीर सामाजिक बुराई है और समाज को लगातार परेशान कर रही है।
इससे पहले, एक निचली अदालत ने सिंह की उम्र और उनके पेशेवर ओहदे का हवाला देते हुए उन्हें अग्रिम ज़मानत दे दी थी। हालांकि, ज़मानत रद्द होने से कानूनी और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है, क्योंकि सिंह एक पूर्व जज के तौर पर काफी ऊंचा ओहदा रखती हैं। यह जांच घरेलू क्रूरता, ज़बरदस्ती गर्भपात और शारीरिक हमले के गंभीर आरोपों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके चलते आखिरकार भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में परिवार के घर के अंदर ही एक मौत हो गई।
अब जब अग्रिम राहत रद्द हो गई है, तो उम्मीद है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) उन्हें हिरासत में लेने की दिशा में आगे बढ़ेगा। यह मामला Twisha Sharma की दुखद मौत से जुड़ा है, जिनकी शादी सिंह के बेटे, समर्थ सिंह से हुई थी। उनकी मौत के तुरंत बाद दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद दहेज से जुड़ी मौत और उकसाने से संबंधित धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया गया था।
कोई भी क़ानून से ऊपर नहीं
अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि सिंह ने, अपनी न्यायिक पृष्ठभूमि के बावजूद, Twisha Sharma के खिलाफ उत्पीड़न को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई, जिसके चलते आखिरकार उनकी मौत हो गई। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फ़ैसला न्यायपालिका की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है, जिसके तहत वह किसी भी पद या पिछली सेवा की परवाह किए बिना जवाबदेही सुनिश्चित करती है। यह आदेश दहेज से जुड़े अपराधों को पूरी गंभीरता से लेने के अदालत के रुख को भी दर्शाता है, और इस सिद्धांत को मज़बूत करता है कि कोई भी क़ानून से ऊपर नहीं है।
हाई कोर्ट के दखल के बाद, सिंह को अब गिरफ़्तारी और हिरासत में पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है। उम्मीद है कि इससे Twisha Sharma की मौत से जुड़े हालात पर और ज़्यादा रोशनी पड़ेगी। समर्थ सिंह पहले से ही 29 मई तक रिमांड पर CBI की हिरासत में हैं। संभावना है कि यह मामला न्यायिक निष्पक्षता और भारत में दहेज प्रथा के ख़िलाफ़ व्यापक लड़ाई पर होने वाली चर्चाओं में एक अहम मिसाल बनेगा।
