ये 5 कैंसर है सबसे खतरनाक... कितने प्रतिशत होते हैं बचने के चांस, डॉक्टरों ने बताई पूरी बात

punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 06:36 PM (IST)

नेशनल डेस्क : कैंसर ऐसी बीमारी है जिसमें समय सबसे बड़ा हथियार भी है और सबसे बड़ी चुनौती भी। बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आती है, इलाज की संभावना उतनी ही मजबूत होती है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर कौन सा कैंसर सबसे ज्यादा खतरनाक होता है? क्या ब्लड कैंसर ही सबसे घातक है या कुछ और?

डॉ. नेहा गर्ग, वरिष्ठ सलाहकार एवं चिकित्सा ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख, एंड्रोमेडा कैंसर अस्पताल, के अनुसार कोई एक कैंसर ऐसा नहीं जिसे ‘सबसे खतरनाक’ कहा जा सके। कैंसर की गंभीरता उसकी स्टेज, प्रकार और मरीज की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है। हालांकि कुछ कैंसर ऐसे हैं जिन्हें चिकित्सा विज्ञान में अधिक आक्रामक और जानलेवा माना जाता है।

ये कैंसर माने जाते हैं ज्यादा घातक

विशेषज्ञों के मुताबिक पैंक्रियाटिक (अग्नाशय) कैंसर, लिवर कैंसर, छोटी कोशिका फेफड़ों का कैंसर (SCLC) और ग्लियोब्लास्टोमा (दिमाग का कैंसर) अपेक्षाकृत अधिक खतरनाक माने जाते हैं। इनकी पहचान अक्सर देर से होती है, जिससे उपचार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

5 साल की सर्वाइवल रेट क्या कहती है?

  • पैंक्रियाटिक कैंसर: लगभग 8 से 13 प्रतिशत तक मरीज पांच साल तक जीवित रह पाते हैं। शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए तो संभावना कुछ बेहतर हो सकती है।
  • लिवर कैंसर: औसतन करीब 13 प्रतिशत मामलों में पांच साल तक जीवित रहने की संभावना रहती है।
  • ग्लियोब्लास्टोमा: दिमाग के इस आक्रामक कैंसर में पांच साल की सर्वाइवल दर लगभग 12 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है, जबकि औसत जीवनकाल 12 से 18 महीने हो सकता है।
  • छोटी कोशिका फेफड़ों का कैंसर (SCLC): इसमें बचने की संभावना 7 प्रतिशत से भी कम बताई जाती है।
  • एसोफेजियल (ग्रासनली) कैंसर: पांच साल की सर्वाइवल दर लगभग 16 प्रतिशत तक हो सकती है।

बचाव का सबसे मजबूत तरीका क्या है?

डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर से लड़ाई में सबसे अहम कदम है समय पर जांच। शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण—जैसे लगातार वजन घटना, असामान्य गांठ, खांसी या खून आना—को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

यदि परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है तो नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। शुरुआती स्टेज में पहचान होने पर इलाज के विकल्प अधिक प्रभावी साबित होते हैं और जीवन बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।


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News Editor

Parveen Kumar

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