पश्चिम बंगाल में फिलहाल नहीं पेश होगा UCC विधेयक, सरकार बना सकती है उच्च स्तरीय समिति

punjabkesari.in Monday, Jun 29, 2026 - 04:05 PM (IST)

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश होने की संभावना नहीं है। राज्य सरकार मामले की जांच के लिए इसकी जगह उच्च स्तरीय समिति का गठन कर सकती है। विधानसभा सूत्रों ने बताया कि भविष्य में इस विधेयक का पेश होना समिति की सिफारिशों या उसकी रिपोटर् पर निर्भर कर सकता है। समिति के सदस्यों और इसकी कार्यप्रणाली को लेकर हालांकि अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

विधि विभाग की मंजूरी नहीं 
राज्य विधानसभा बजट सत्र का पहला चरण सोमवार को समाप्त हो रहा है। वहीं इसका दूसरा चरण सात जुलाई से शुरू होगा। ऐसी भी चर्चा है कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार सत्र के पहले चरण के आखिरी दिन विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश कर सकती है। वहीं राज्य सरकार सूत्रों ने कहा कि विधेयक को अभी तक विधि विभाग की मंजूरी नहीं मिली है। यह विभाग पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास है।

यूसीसी के मुद्दे पर सीएम जानिए का ये रहा बयान
विभागीय सूत्रों ने बताया कि अभी यह भी तय नहीं है कि सरकार सात जुलाई से शुरू होने वाले दूसरे चरण में विधेयक को पेश करने की मंजूरी देगी या नहीं। इस बीच नबन्ना सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री आज विधानसभा में मौजूद रह सकते हैं और वह यूसीसी के मुद्दे पर बयान दे सकते हैं। उम्मीद है कि उनके संबोधन से प्रस्तावित समिति को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो जायेगी। गुरुवार शाम से ही यूसीसी विधेयक पेश होने की अटकलें तेज हो गयी थीं। उस दिन विधानसभा सत्र के पहले भाग में मुख्यमंत्री अधिकारी ने अपने भाषण के दौरान इस विधेयक का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने उसी रात पार्टी कार्यक्रम में अपनी बात दोहरायी। इससे विधेयक के पेश होने की संभावनाओं को लेकर चर्चा और तेज हो गयी। विधेयक में देरी के फैसले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है

कई भाजपा शासित राज्यों में लागू है यूसीसी कानून 
हालांकि इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों का मानना है कि प्रशासन ऐसे संवेदनशील मामले पर फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहता है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रस्तावित कानून में कोई कमी न रहे। रिपोटरं के मुताबिक, राज्य भाजपा सरकार आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करना चाहती है। कई भाजपा शासित राज्यों ने भी यूसीसी कानून लाने से पहले इसी तरह की प्रक्रिया अपनायी है। अब तक उत्तराखंड, गुजरात और असम में यूसीसी लागू हो चुका है। इन राज्यों में कानून का मसौदा तैयार करने के लिए समितियों का गठन किया गया था। 

यूसीसी विधेयक पेश करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड
देश में यूसीसी विधेयक पेश करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड बना था। उत्तराखंड में विधेयक पेश किए जाने से पहले पूर्व उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। बाद में गुजरात की यूसीसी समिति में भी उन्होंने काम किया। असम ने भी ऐसी ही समिति का गठन किया था। हाल ही में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने भी यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाये हैं। दोनों राज्यों ने कानून का मसौदा तैयार करने के लिए समितियां बनाने का फैसला किया है। 


 


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Content Writer

Ramkesh

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