कांग्रेस ने इस सीनियर नेता को पार्टी से बाहर निकाला, जानें बड़ी वजह

punjabkesari.in Saturday, Jan 24, 2026 - 12:04 AM (IST)

नेशनल डेस्क: कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शुक्रवार को बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए पार्टी के सीनियर नेता राजीव गौड़ा को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई शिदलाघट्टा की नगर आयुक्त अमृता गौड़ा के खिलाफ फोन पर अभद्र भाषा और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने के मामले में की गई है। नगर आयुक्त की शिकायत के बाद 14 जनवरी को राजीव गौड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

अमृता गौड़ा ने आरोप लगाया था कि उनकी तस्वीर वाला बैनर हटाने पर राजीव गौड़ा ने फोन पर उन्हें गालियां दीं और धमकी भी दी। मामला सामने आने के बाद से ही यह विवाद कांग्रेस के लिए राजनीतिक और नैतिक रूप से परेशानी का कारण बना हुआ था।

कांग्रेस अनुशासन समिति ने क्या कहा?

कांग्रेस राज्य अनुशासन समिति के अध्यक्ष के. रहमान खान ने निलंबन आदेश जारी करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राजीव गौड़ा को पार्टी से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि घटना के 10 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक राजीव गौड़ा का पता नहीं लगा पाई है और वे फरार हैं।

KPCC की सिफारिश पर हुई कार्रवाई

इससे पहले कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) ने बुधवार, 21 जनवरी को राजीव गौड़ा को निलंबित करने की सिफारिश की थी। इस घटना के कारण कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना का सामना करना पड़ा। डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने साफ कहा था कि यदि पार्टी के किसी नेता ने ऐसा कृत्य किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डीके शिवकुमार के करीबी माने जाते हैं राजीव गौड़ा

राजीव गौड़ा ने पिछले विधानसभा चुनाव में सिदलाघट्टा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उन्हें खाद्य मंत्री के.एच. मुनियप्पा और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का करीबी माना जाता है। KPCC अध्यक्ष डीके शिवकुमार के निर्देश पर राज्य अनुशासन समिति ने उन्हें 15 जनवरी 2026 को नोटिस जारी किया था, लेकिन उन्होंने अब तक इसका कोई जवाब नहीं दिया।

प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष (प्रशासन) जी.सी. चंद्रशेखर ने अनुशासन समिति को लिखे पत्र में कहा कि राजीव गौड़ा के बयान मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित हुए हैं, जिससे पार्टी और उसके नेतृत्व को गंभीर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। इसी के बाद निलंबन की प्रक्रिया तेज की गई।

हाई कोर्ट की कड़ी फटकार

इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता को महिला नगर आयुक्त को धमकी और गाली देने के मामले में फटकार लगाई और राज्य सरकार से सवाल किया कि उनके खिलाफ गंभीर धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा,
“क्या याचिकाकर्ता को महिलाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है? इस तरह की भाषा कैसे इस्तेमाल की जा सकती है? बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते। एक अनियंत्रित ज़ुबान सब कुछ बर्बाद कर सकती है।”


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News Editor

Parveen Kumar

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