किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, केंद्र सरकार ने गेहूं और चीनी के निर्यात को दी मंजूरी
punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 05:18 PM (IST)
नेशनल डेस्क : घरेलू बाजार में अनाज की प्रचुर उपलब्धता और गोदामों में भरपूर भंडारण के मद्देनजर केंद्र सरकार ने निर्यात नीति में अहम ढील दी है। शुक्रवार को जारी फैसले के तहत 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी को विदेश भेजने की अनुमति प्रदान की गई। इस कदम का उद्देश्य बाजार में मूल्य संतुलन बनाए रखना और नई रबी फसल के आगमन से पहले किसानों को बेहतर दाम सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
खाद्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केवल कच्चे गेहूं ही नहीं, बल्कि 5 लाख टन गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात को भी मंजूरी दी गई है। सरकार का आकलन है कि मौजूदा स्टॉक स्तर देश की खाद्य जरूरतों के लिए पर्याप्त है, इसलिए निर्यात से आपूर्ति पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
भंडार की मजबूत स्थिति ने दिया भरोसा
ताजा आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में निजी कंपनियों और व्यापारियों के पास करीब 75 लाख टन गेहूं उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। वहीं भारतीय खाद्य निगम के पास 1 अप्रैल 2026 तक केंद्रीय पूल में लगभग 182 लाख टन गेहूं होने का अनुमान है।
खेती के मोर्चे पर भी तस्वीर सकारात्मक है। रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले साल के 328.04 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। इससे संकेत मिलता है कि इस बार भी उत्पादन मजबूत रहने की संभावना है।
चीनी उद्योग को अतिरिक्त अवसर
सरकार ने चीनी क्षेत्र को भी राहत दी है। 2025-26 सत्र के लिए इच्छुक मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई है। इससे पहले 14 नवंबर 2025 को 15 लाख टन निर्यात की मंजूरी दी गई थी, लेकिन निर्यात की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही।
नई व्यवस्था के तहत कोटा केवल उन्हीं मिलों को मिलेगा जो निर्धारित शर्तों का पालन करने को तैयार होंगी। आवंटित मात्रा का कम से कम 70 प्रतिशत 30 जून 2026 तक निर्यात करना अनिवार्य होगा। कोटा अनुपातिक आधार पर दिया जाएगा और इसे किसी अन्य मिल को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा।
बाजार स्थिरता और किसानों के हित पर फोकस
सरकार का मानना है कि निर्यात की अनुमति से बाजार में नकदी प्रवाह बेहतर होगा और किसानों को मजबूरी में कम दाम पर बिक्री करने से राहत मिलेगी। पीक सीजन के दौरान संभावित दबाव को कम करने और कीमतों को सहारा देने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
