तमिलनाडु: SIR में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटे, वामदलों का विरोध तेज

punjabkesari.in Thursday, Oct 01, 2026 - 05:14 PM (IST)

चेन्नई : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत राज्य में कथित तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में वामपंथी दलों ने बृहस्पतिवार को पूरे तमिलनाडु में प्रदर्शन तेज कर दिए। वामदलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे या उनके खिलाफ महाभियोग लाने की मांग की। यहां वाशरमैन पेट के पास एक प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर का इस्तेमाल चुनिंदा मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के हथियार के रूप में किया जा रहा है। 

षणमुगम ने कहा, "एसआईआर प्रक्रिया के जरिए निर्वाचन आयोग अपने उस मूल कर्तव्य से भटक गया है, जिसके तहत सभी योग्य नागरिकों को मताधिकार देना, निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित कराना और ईमानदारी से चुनाव कराना शामिल था। इस कर्तव्य को पूरा करने के बजाय मुख्य निर्वाचन आयुक्त लोगों का मताधिकार छीन रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत की जनता के साथ बड़ा विश्वासघात किया है।" उन्होंने कहा, "इसलिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को एक मिनट भी अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए।" 

नुंगमबाक्कम में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वासुकी ने चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सीईसी को हटाना, एसआईआर कवायद को रोकना, हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ना और निर्वाचन आयोग की चयन समिति का पुनर्गठन करना शामिल है। उन्होंने कहा, "जिस निर्वाचन आयोग के पास अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी थी, वह अब 13 करोड़ लोगों का मताधिकार छीनने वाला निकाय बन गया है।" उन्होंने बताया कि वामदल इस मुद्दे पर व्यापक विरोध दर्ज कराने के लिए गैर-इंडिया गठबंधन दलों जैसे आम आदमी पार्टी (आप) से भी संपर्क कर रहे हैं। के. के. नगर में सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) के राज्य सचिव वीरपांडियन ने सीईसी की कार्रवाई को "लोकतंत्र की हत्या" करार दिया और केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।


 


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News Editor

Rahul Singh

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