आगामी चुनावों में SIR से पहले की मतदाता सूची और ईवीएम की जगह मत पत्र का इस्तेमाल हो: खरगे

punjabkesari.in Wednesday, Sep 30, 2026 - 01:47 PM (IST)

नई दिल्लीः कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद के विषय पर 'इंडिया' गठबंधन के घटक दलों से एकजुटता का आह्वान किया और कहा कि आगामी चुनावों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले की मतदाता सूची का इस्तेमाल होना चाहिए और ईवीएम के स्थान पर मत पत्र से मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) की बैठक में यह भी कहा कि ''एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य'' भारत के लोकतंत्र की बुनियाद है और इसे कमजोर नहीं होने दिया जा सकता।

खरगे ने कहा कि विपक्षी दलों ने लंबे समय से ईवीएम, मतदाता सूची में "हेरफेर" और ''अस्पष्ट'' बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष कहा कि राहुल गांधी ने कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र में कथित अनियमितताओं को प्रमाण के साथ सामने रखा तथा 'इंडिया' गठबंधन के घटक दलों ने भी इस संबंध में सवाल और आपत्तियां उठाईं, लेकिन निर्वाचन आयोग ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा कि निर्वाचन आयोग इसे मतदाता सूची को साफ और अद्यतन करने की प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन यदि इसके कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर किया जाता है या उन्हें दोबारा अपनी पात्रता साबित करनी पड़ती है, तो यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी व्यवस्था की है कि कोई वास्तविक, पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न हो।

उन्होंने दावा किया कि ''13.3 करोड़ मतदाताओं'' के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम हटाया जाता है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि नाम किसका हटाया गया और क्यों हटाया गया। खरगे ने कहा, ''कोई भी वास्तविक भारतीय नागरिक अपारदर्शी, मनमानी या अपर्याप्त निगरानी वाली प्रक्रिया के जरिए चुनावी प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।'' कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विश्वसनीय चुनाव के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन आयोग जरूरी है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि आयोग के दो अन्य सदस्यों ने 10 महीने में 14 बार उनके साथ मतभेद जताए हैं।

खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि यदि उनमें ''संवैधानिक या नैतिक शर्म'' बची है तो उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने 2023 में पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी चयन समिति से भारत के प्रधान न्यायाधीश को हटाकर एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया। खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग का स्वतंत्र होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका स्वतंत्र दिखाई देना भी जरूरी है।

उन्होंने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का मुद्दा भी उठाया और कहा कि हर साल लाखों युवा मतदान के योग्य होते हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए ऐसी प्रक्रियात्मक बाधाएं नहीं होनी चाहिए जो उन्हें मतदान से हतोत्साहित करें। ईवीएम के मुद्दे पर खरगे ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन को ईवीएम के बजाय मतपत्र से मतदान की व्यवस्था बहाल करने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रणाली में लोगों का विश्वास और भरोसा बहाल करना जरूरी है। खरगे ने 'इंडिया' गठबंधन के सामने छह सूत्री कार्यक्रम भी रखा। इसमें भविष्य के चुनावों के लिए एसआईआर से पहले की मतदाता सूची के इस्तेमाल, मतदाता सूची के हर संशोधन में पूर्ण पारदर्शिता, किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले नोटिस और कारण बताने तथा प्रभावी अपील व्यवस्था की मांग शामिल है।

इसके अलावा उन्होंने प्रशासनिक खामियों, अपर्याप्त दस्तावेज या जागरूकता की कमी के कारण पात्र मतदाताओं के नाम हटने से सुरक्षा, ईवीएम के स्थान पर मतपत्र से मतदान, युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों के लिए सरल पंजीकरण प्रक्रिया तथा ऐसी निर्वाचन संस्था की मांग की जो सभी राजनीतिक दलों का विश्वास अर्जित कर सके। खरगे ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन को यह सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए कि ''पारदर्शिता की जगह गोपनीयता'' न ले और ''एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य'' का सिद्धांत कमजोर न हो। उन्होंने कहा, मतपत्र जनता का है। जनादेश जनता का है। सरकार की शक्ति अंततः जनता के हाथों में है।


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Content Editor

Sahil Kumar

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