कोरोना काल में मनमाने पैसे वसूल रहे अंतिम संस्कार और एंबुलेंस वालों पर दिल्ली HC सख्त, कही ये बात

5/6/2021 3:23:19 PM

नेशनल डेस्क: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली सरकार से कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना संकट के बीच दाह संस्कार और एंबुलेंस के लिए भारी-भरकम शुल्क लेने के आरोपों संबंधी अभिवेदन को जनहित में प्रतिवेदन के तौर ले। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि इन अभिवेदनों पर कानून, नियमों, नियामकों और ऐसे मामलों पर लागू सरकारी की नीति के आधार पर फैसला किया जाएगा। अदालत ने कहा कि फैसला यथा संभव शीघ्र और व्यवहारिक रूप में लिया जाए। अदालत ने इन टिप्पणियों के साथ गैर सरकारी संगठन (NGO) डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कॉलेक्टिव की याचिका का निस्तारण कर दिया।

 

दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अनुज अग्रवाल ने पीठ से कहा कि नगर निकायों को भी NGO की याचिका में पक्षकार के तौर पर लिया जाए क्योंकि वे भी श्मशान भूमि का प्रबंधन करते हैं। इसी तरह की याचिका एक वकील ने दायर की थी जिसमें एंबुलेंस द्वारा भारी-भरकम शुल्क लेने का मुद्दा उठाया गया था लेकिन अदालत ने इस पर विचार करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि यह बगैर किसी तैयारी के दायर की गई है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता निमेश जोशी अगर इसे वापस नहीं लेते हैं तो वह इसे अदालत खर्च जमा कराने के आदेश के साथ खारिज कर देगी। इस पर याचकाकर्ता ने इसे वापस ले लिया।

 

गैर सरकारी संगठन की ओर से वकील एमपी श्रीविजनेश, रॉबिन राजू और दीपा जोसेफ ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि कोरोना के मुश्किल समय में श्मशान और कब्रिस्तान में शुल्क लेने संबंधी नीति की जरूरत है। याचिका में कहा गया कि ऐसी नीति के अभाव में covid-19 से होने वाली मौतों में लाशों का दाह संस्कार करने के लिए निर्धारित श्मशान और कब्रिस्तान भूमि की देखरेख करने वाले और अन्य निजी पक्ष दाह संस्कार और शव को दफनाने के लिए अपनी इच्छा और मनमर्जी की रकम वसूली कर रहे हैं। इस संगठन ने कहा कि दिल्ली में एंबुलेंस सेवा प्रदाता कम दूरी के लिए भी अनुचित किराया वसूल रहे हैं।


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Content Writer

Seema Sharma

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