‘हर फ्री चीज़ मुफ्तखोरी नहीं!’—फ्रीबीज केस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 09:29 PM (IST)
नेशनल डेस्क: चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा घोषित की जाने वाली मुफ्त योजनाओं यानी फ्रीबीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे को देश की अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था से जुड़ा अहम विषय बताते हुए इस पर विस्तृत विचार की जरूरत बताई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने संकेत दिए हैं कि इस मामले की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर जल्द की जाएगी।
देश पर भारी कर्ज, फ्रीबीज पर उठे सवाल
इस मामले में याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट से लंबित याचिका पर शीघ्र सुनवाई की मांग की। उन्होंने दलील दी कि देश पर करीब 250 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और चुनावी फ्रीबीज की होड़ से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। उनका कहना था कि इस प्रवृत्ति से विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
CJI की अहम टिप्पणी: हर मुफ्त सुविधा ‘फ्रीबीज’ नहीं
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि इस विषय का एक पहलू नीति निर्धारण से जुड़ा हो सकता है, लेकिन यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि क्या राज्य के संसाधनों का बड़ा हिस्सा केवल तात्कालिक वादों में खर्च होना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी सुविधाएं सरकार का संवैधानिक दायित्व हैं, क्योंकि ये नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ी होती हैं। ऐसी योजनाओं को आंख मूंदकर “मुफ्तखोरी” कहना उचित नहीं होगा।
चुनावी वादे बनाम आर्थिक सेहत
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि चुनावी घोषणाओं और राज्य की वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, इस पर गंभीर और व्यावहारिक चर्चा जरूरी है। अदालत का मानना है कि बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के यह मुद्दा भविष्य में और जटिल हो सकता है।
जल्द तय होंगे दिशा-निर्देश
कोर्ट ने मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का फैसला लिया है। उम्मीद की जा रही है कि सुनवाई के बाद चुनावी फ्रीबीज को लेकर स्पष्ट और व्यावहारिक गाइडलाइंस सामने आ सकती हैं, जिससे लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था दोनों को संतुलन में रखा जा सके।
