‘…आपको अंडों से डर लगता है’, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की महुआ मोइत्रा की याचिका?
punjabkesari.in Friday, Aug 07, 2026 - 03:41 PM (IST)
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मोइत्रा ने फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट डालने के आरोप वाले मामले में पुलिस के सामने वर्चुअली (ऑनलाइन) पेश होने की इजाजत मांगी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने उनकी इस चिंता को खारिज कर दिया कि पुलिस स्टेशन जाने पर उन पर अंडे फेंके जा सकते हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस दत्ता ने कहा, “आप सांसद हैं? राजनीति में आने के बाद भी आपको अंडों से डर लगता है? जबकि हमारे आजादी की लड़ाई लड़ने वालों ने अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं? ऐसी अर्जियां तो इस कोर्ट के सामने आनी ही नहीं चाहिए।”
मामला कैसे शुरू हुआ?
जून में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए दो वीडियो में मोइत्रा की टिप्पणियों को लेकर एक बीजेपी नेता की शिकायत पर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। यह मामला तब दर्ज हुआ जब बीजेपी समर्थक कथित तौर पर कृष्णानगर में एक कोर्ट के बाहर उन पर अंडे और टमाटर फेंकने के लिए जमा हुए थे। पिछले महीने कलकत्ता हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग वाली मोइत्रा की याचिका पर उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी। लेकिन कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
आज सुप्रीम कोर्ट में मोइत्रा की तरफ से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि एक फेसबुक पोस्ट की वजह से उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उन्होंने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच अधिकारी के सामने पेश होने की इजाजत मांगी। कोर्ट ने सवाल किया, “वर्चुअली क्यों? क्या इसलिए कि आप एक सांसद हैं?” वकील ने जवाब दिया कि उन्हें डर है कि अगर वह शारीरिक रूप से पेश होती हैं तो भीड़ उन पर हमला कर सकती है। उन्होंने बताया कि पिछली बार जब वह वहां गई थीं तो धमकियां मिली थीं और सच में अंडे भी फेंके गए थे।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट उनकी दलील से सहमत नहीं हुआ। जजों ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही उन्हें जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने के लिए कह चुका है। कोर्ट ने विवादित आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वह पेश नहीं हो रही हैं तो हाई कोर्ट के सामने नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें। इसके बाद वकील ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया। नतीजतन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस ली गई मानकर खारिज कर दिया।
