BRICS 2026 पर चीन का संदेश: भारत संग मिलकर बढ़ाएंगे सहयोग
punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 06:27 PM (IST)
International Desk: भारत के BRICS 2026 चेयरशिप की औपचारिक शुरुआत के बीच चीन ने समूह के भीतर सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि बीजिंग अन्य देशों के साथ मिलकर “ग्रेटर BRICS” के उच्च-गुणवत्ता वाले विकास के लिए तैयार है। राजदूत शू फेइहोंग ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा BRICS इंडिया 2026 की वेबसाइट, लोगो और थीम के लॉन्च पर किए गए पोस्ट को दोबारा साझा करते हुए सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि चीन एक समान, व्यवस्थित बहुध्रुवीय विश्व और सार्वभौमिक रूप से लाभकारी, समावेशी वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण में योगदान देना चाहता है।
इससे पहले, विदेश मंत्री जयशंकर ने BRICS 2026 के लोगो लॉन्च कार्यक्रम में कहा कि मौजूदा समय में दुनिया कई जटिल चुनौतियों से गुजर रही है, ऐसे में पुनर्जीवित, समावेशी और प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार की मांग करते हुए कहा कि इन्हें आज की वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधि और समावेशी बनना चाहिए। जयशंकर ने BRICS द्वारा स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बैंक बुनियादी ढांचे और सतत विकास को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। भारत इसे एक विश्वसनीय, जिम्मेदार और वित्तीय रूप से टिकाऊ संस्था के रूप में मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों से लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Exchanges) BRICS सहयोग का अहम स्तंभ रहेगा, खासकर भारत की चेयरशिप के दौरान। इसमें युवा, संस्कृति, शिक्षा, खेल, पर्यटन और शैक्षणिक आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जयशंकर ने कहा कि भारत BRICS को संवाद और विकास का एक रचनात्मक मंच मानता है, जो व्यापक बहुपक्षीय प्रणाली को पूरक बनाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की चेयरशिप समावेशी, व्यावहारिक, जन-केंद्रित और परिणामोन्मुख होगी। गौरतलब है कि BRICS समूह की शुरुआत 2001 में BRIC के रूप में हुई थी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से यह BRICS बना। 2024 और 2025 में हुए विस्तार के बाद अब यह समूह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में और अधिक प्रभावशाली हो गया है।
