"बंगाल में बम चलता है, कानून नहीं: निर्मला सीतारमण ने ममता सरकार पर जमकर साधा निशाना!
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 09:55 PM (IST)
नेशनल डेस्क: लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उनके बयान के दौरान टीएमसी सांसदों ने विरोध जताया, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। वित्त मंत्री ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि शासन की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा
सीतारमण ने अपने वक्तव्य में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी हालिया घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपराध पर सख्ती से नियंत्रण रखे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में सुरक्षा का माहौल बनाना प्रशासन का दायित्व है और किसी भी तरह की सलाह जो पीड़ितों पर जिम्मेदारी डालती हो, उस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने कुछ आपराधिक घटनाओं और राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान हुई हिंसक घटनाओं का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
जीएसटी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
वित्त मंत्री ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा जीएसटी पर दिए गए बयानों का जवाब देते हुए कहा कि कई आवश्यक वस्तुएं जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूध, शिक्षा (प्री-स्कूल से उच्च शिक्षा तक) और कुछ बुनियादी स्टेशनरी वस्तुओं पर कोई जीएसटी लागू नहीं है। अंत्येष्टि सेवाओं पर भी टैक्स लगाए जाने के दावों को उन्होंने खारिज किया। उन्होंने कहा कि कर व्यवस्था को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने से बचना चाहिए और तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
बंगाल के लिए बजट घोषणाएं
सीतारमण ने यह भी कहा कि बजट में पश्चिम बंगाल के लिए कई परियोजनाओं की घोषणा की गई है। ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का प्रस्ताव, जिसमें दुर्गापुर प्रमुख केंद्र होगा। दनकुनी से सूरत तक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर। वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड कॉरिडोर का जिक्र। जूट उद्योग के पुनरुद्धार के लिए विशेष प्रावधान, किसानों के लिए उर्वरक और कृषि मद में बड़ा बजटीय आवंटन। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासत
सदन में हुई तीखी बहस ने यह संकेत दिया कि बंगाल से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में अहम स्थान रखते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के बयान और आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकते हैं।
