Silver Crash : चांदी में आई बड़ी गिरावट... 4.20 लाख से फिसलकर इतने प्रति किलो तक आ गया भाव, बाजार में मची हलचल
punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 01:43 PM (IST)
नेशनल डेस्क : हाल के दिनों में तेज रफ्तार से बढ़ने वाली चांदी के दामों में अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। जिस चांदी ने कुछ समय पहले रिकॉर्ड स्तर छुआ था, वही अब दबाव में कारोबार कर रही है। Multi Commodity Exchange (MCX) पर चांदी की कीमत गिरकर करीब ढाई लाख रुपये प्रति किलो के आसपास आ गई है। इससे पहले यह लगभग 4.20 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुंची थी। उस रिकॉर्ड स्तर के बाद से लगातार मुनाफावसूली और वैश्विक कारकों के चलते कीमतों में गिरावट जारी है। फिलहाल चांदी 2.30 लाख रुपये से 2.70 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में कारोबार कर रही है।
गिरावट के पीछे प्रमुख कारण
1. अमेरिका के मजबूत आर्थिक संकेत
अमेरिका से आए हालिया आर्थिक आंकड़े मजबूत रहे हैं। इससे यह संभावना कम हो गई है कि वहां की केंद्रीय बैंक जल्द ही ब्याज दरों में कटौती करेगा। जब ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद होती है तो निवेशक कीमती धातुओं से दूरी बनाने लगते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ता है।
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2. डॉलर की मजबूती
ब्याज दरों में कटौती की संभावना घटने से डॉलर मजबूत हुआ है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के लिए चांदी महंगी हो जाती है। इससे वैश्विक मांग प्रभावित होती है और कीमतों में गिरावट आ सकती है।
3. मुनाफावसूली का दबाव
रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया। जब बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली होती है तो कीमतें तेजी से नीचे आती हैं। हालिया गिरावट में मुनाफावसूली की अहम भूमिका मानी जा रही है।
4. अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में भी चांदी के दाम ऊंचे स्तर से नीचे आए हैं। वहां की गिरावट का सीधा असर भारतीय बाजार की धारणा और कारोबार पर पड़ा है, जिससे घरेलू कीमतों में भी कमजोरी देखी गई।
निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ी?
चांदी की तेज गिरावट ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कीमतों में अभी और गिरावट आएगी या फिर यहां से दोबारा तेजी शुरू हो सकती है। हालिया उतार-चढ़ाव से यह संकेत मिल रहा है कि बाजार फिलहाल अस्थिर दौर से गुजर रहा है।
आगे की संभावनाएं
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में चांदी पर दबाव बना रह सकता है, खासकर यदि डॉलर मजबूत रहता है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं जारी रहती हैं। हालांकि दीर्घकाल में चांदी की औद्योगिक मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में चांदी की खपत बढ़ रही है, जिससे लंबे समय में कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में घबराहट में फैसला लेने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे में लंबी अवधि की रणनीति के साथ और जोखिम को समझकर निवेश करना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है। फिलहाल बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और डॉलर की चाल पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
