Share Market Crash: शेयर बाजार धड़ाम! 1,069 अंक लुढ़का सेंसेक्स, बाजार में मचा हड़कंप

punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 06:00 PM (IST)

नेशनल डेस्कः मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 1,069 अंक यानी 1.28% की गिरावट के साथ 82,225.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 1.12% फिसलकर 25,424.65 पर आ गया। मिड- और स्मॉल-कैप इंडेक्स भी लाल निशान में बंद हुए, लेकिन वे बेंचमार्क से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन कर सके। BSE 150 मिडकैप इंडेक्स 0.40% गिरा, और BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 0.76% के नुकसान के साथ बंद हुआ। बीएसई-लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले 469 लाख करोड़ रुपए से घटकर 466 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

विश्लेषकों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं, जिन्हें “शेयर बाजार के पांच विलेन” कहा जा सकता है।

अमेरिकी टैरिफ का डर

हाल ही में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के कुछ ग्लोबल टैरिफ फैसलों को रद्द किया था। लेकिन इसके बाद अमेरिका ने 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 का इस्तेमाल करके टैरिफ रणनीति को और सख्त करने की योजना बनाई।
विशेषज्ञों का कहना है कि 24 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में जो संकेत मिलेंगे, उनका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव

ईरान में विरोध प्रदर्शन और सरकार के कड़े कदमों के कारण निवेशक सतर्क हैं। अमेरिका ने ईरान पर मिलिट्री कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर वार्ता का अगला राउंड 26 फरवरी को होने वाला है, जिसे बाजार काफी नजदीक से देख रहा है।

IT सेक्टर में बिकवाली

निवेशकों ने IT शेयरों में बड़ी बिकवाली की। निफ्टी IT इंडेक्स मंगलवार को लगभग 5% गिरा और फरवरी में अब तक लगभग 21% का नुकसान हुआ। इस गिरावट में वैश्विक निवेशकों का भरोसा कमजोर होना और अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरों की चिंता मुख्य कारण रही।
उदाहरण के लिए, IBM के शेयर 30 साल के निचले स्तर पर आ गए, वहीं एंथ्रोपिक के क्लाउड कोड टूल ने IT कंपनियों में और बेचैनी बढ़ा दी।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी

ब्रेंट क्रूड का भाव 1% बढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो छह महीने के उच्च स्तर के करीब है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल आयातक है। बढ़ी हुई तेल कीमतें महंगाई और मुद्रा विनिमय दर पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा।

मजबूत अमेरिकी डॉलर

डॉलर इंडेक्स 0.20% बढ़ा और 98 के स्तर की ओर बढ़ रहा है। मजबूत डॉलर उभरते बाजारों के लिए चिंता का कारण है क्योंकि इससे विदेशी निवेश के बाहर जाने का जोखिम बढ़ जाता है। हाल ही में भारत में विदेशी संस्थागत निवेश (FII) ने कुछ खरीदारी की थी, लेकिन डॉलर के मजबूती के कारण यह प्रवाह प्रभावित हो सकता है।


 


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Content Editor

Sahil Kumar

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