CJP प्रदर्शन: छात्र को 5 लाख रुपये के नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, CJI सूर्यकांत ने पूछा- मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई?

punjabkesari.in Wednesday, Sep 09, 2026 - 01:19 PM (IST)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा दूसरे साल के एक छात्र को नोटिस जारी करने पर कड़ी आपत्ति जताई। यह नोटिस छात्र द्वारा प्रस्तावित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के अभियान के कथित आयोजन के संबंध में भेजा गया था, जबकि शीर्ष अदालत ने पहले ही आंदोलन के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ ज़बरदस्ती की कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था।

यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने मौखिक रूप से उठाया गया। वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के दूसरे साल के छात्र को यह नोटिस जारी किया गया था। CJI ने कहा, "एक मजिस्ट्रेट की नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे हुई? हमने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ ज़बरदस्ती की कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।"

वकील ने बताया कि छात्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था कि शांति बनाए रखने के लिए उससे 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही राशि की दो ज़मानत क्यों न मांगी जाए। CJI ने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द कर चुका था और छात्रों के खिलाफ ज़बरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगा चुका था, तो मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं।

बेंच ने वकील से कहा कि वे याचिका के ज़रिए नोटिस को रिकॉर्ड पर लाएं और कहा कि वे संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगेंगे। वकील ने कहा कि प्रेस में मामला आने के बाद नोटिस वापस ले लिया गया था। वकील ने कहा कि यह कार्रवाई "प्रथम दृष्टया अवमानना" (prima facie contempt) के बराबर है और आरोप लगाया कि नोएडा और उत्तर प्रदेश के अधिकारी छात्रों के बीच "डर का माहौल" बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में परीक्षा पेपर को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को खत्म कर दिया था। पांच राज्यों में दर्ज FIR को रद्द करके और यह निर्देश देकर कि दूसरी जगहों पर ऐसे मामलों को आगे न बढ़ाया जाए। 


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Content Editor

Anu Malhotra

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