BJP प्रवक्ता RP Singh ने पंजाब की आर्थिक स्थिति को लेकर मान सरकार को घेरा
punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 11:25 AM (IST)
नेशनल डेस्क: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने पंजाब की आर्थिक स्थिति को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पंजाब की वित्तीय स्थिति के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि राज्य लगातार गहरे आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। आरपी सिंह ने दावा किया कि हाल ही में जारी 'फिस्कल हेल्थ इंडेक्स' (Fiscal Health Index) में देश के प्रमुख राज्यों की सूची में पंजाब को 18वां यानी सबसे आखिरी स्थान मिला है। इस इंडेक्स में पंजाब का स्कोर मात्र 12.4 दर्ज किया गया है।
सिंह ने ट्वीट कर बताए आंकड़े-
भाजपा प्रवक्ता ने पिछले एक दशक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब की वित्तीय स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि "साल 2014 से 2017 के बीच पंजाब का वित्तीय स्कोर जहाँ 19.9 पर था, वहीं अब यह और ज्यादा गिरकर 12.4 पर आ चुका है। यह गिरावट पिछले एक दशक से लगातार जारी है।"
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आंकड़े झूठ नहीं बोलते और न ही पंजाब की लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति।
— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) July 16, 2026
ताज़ा Fiscal Health Index में पंजाब को प्रमुख राज्यों में 18वां (अंतिम) स्थान मिला है, और उसका स्कोर मात्र 12.4 है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि पंजाब पिछले एक दशक से लगातार सबसे नीचे बना हुआ है। वर्ष… pic.twitter.com/YzZDJYt8Ex
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स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है सीधा असर
आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के कथित वित्तीय कुप्रबंधन का सबसे बड़ा नुकसान पंजाब की स्वास्थ्य सेवाओं को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार विज्ञापनों और राजनीतिक प्रचार पर भारी-भरकम राशि खर्च कर रही है, तो दूसरी तरफ राज्य के सरकारी अस्पताल बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों, जीवन रक्षक दवाइयों और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की भारी किल्लत है।
ठोस सुधारों की आवश्यकता
BJP नेता ने पंजाब की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, राजस्व की वसूली कमजोर है और विकास कार्यों के लिए होने वाला Capital Expenditure पूरी तरह थम गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब को केवल सुर्खियों में रहने वाली राजनीति की नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन, जवाबदेही और बड़े संरचनात्मक सुधारों की तुरंत जरूरत है, ताकि इस आर्थिक संकट को और गहराने से रोका जा सके।
