सिंधु जल संधि पर तेज हुई सियासत... भाजपा प्रवक्ता ने भगवंत मान से की विशेष सत्र बुलाने की मांग
punjabkesari.in Thursday, Jul 02, 2026 - 09:23 PM (IST)
नेशनल डेस्क : सिंधु जल संधि को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब सरकार से इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और भारत के जल अधिकारों के पूर्ण उपयोग के समर्थन में प्रस्ताव पारित करने की मांग की है।
भाजपा प्रवक्ता ने अपने पोस्ट में कहा कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि उस समय की भू-राजनीतिक परिस्थितियों में हुई थी, जबकि वर्तमान हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उनका आरोप है कि पाकिस्तान ने वर्षों से युद्ध, सीमा पार आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के जरिए शांति को प्रभावित किया है। साथ ही, उसने संधि के तहत भारत की वैध जलविद्युत परियोजनाओं में भी लगातार बाधाएं उत्पन्न की हैं।
उन्होंने कहा कि संधि के तहत भारत को आवंटित रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के जल का अधिक प्रभावी उपयोग पंजाब के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है। उनके अनुसार, इससे सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने, गिरते भूजल स्तर के पुनर्भरण, किसानों को सशक्त बनाने और प्रदेश की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
1960 की सिंधु जल संधि उस दौर में हुई थी, जब भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ आज से बिल्कुल अलग थीं। तब से पाकिस्तान ने बार-बार युद्ध, सीमा पार आतंकवाद और लगातार शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से शांति को कमजोर किया है। साथ ही, उसने संधि के तहत भारत की वैध जलविद्युत परियोजनाओं में भी…
— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) July 1, 2026
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारत को संधि के प्रावधानों के तहत सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजनाएं, घरेलू उपयोग और सीमित सिंचाई परियोजनाएं विकसित करने का अधिकार प्राप्त है, जिनका पूरा उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब ने दशकों तक देश का अन्न भंडार भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में भारत के हिस्से के जल का प्रभावी उपयोग केवल रणनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि पंजाब के किसानों और भारतीय कृषि के भविष्य के लिए आर्थिक रूप से भी जरूरी है।
भाजपा प्रवक्ता ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील करते हुए कहा कि यदि वह राज्य के किसानों और जल सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सर्वसम्मति से ऐसा प्रस्ताव पारित करना चाहिए, जिसमें केंद्र सरकार से सिंधु जल संधि के तहत भारत को मिले वैध अधिकारों का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाए।
