तेहरान को दहलाने वाली खबर: क्या इजरायली स्ट्राइक में ढेर हो गए IRGC के टॉप कमांडर तंगसीरी?

punjabkesari.in Thursday, Mar 26, 2026 - 02:08 PM (IST)

दुबई/यरूशलेम: मध्य पूर्व की सुलगती आग के बीच एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने ईरान के सत्ता गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इजरायल की ओर से किए गए एक ताजा और बेहद सनसनीखेज दावे के मुताबिक, ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) की नौसेना के सर्वेसर्वा अलीरेजा तंगसीरी अब इस दुनिया में नहीं रहे।

इजरायली आधिकारिक सूत्रों की मानें तो एक गुप्त और सटीक हमले के जरिए इस बड़े सैन्य अधिकारी को निशाना बनाया गया है। यह पूरी कार्रवाई ईरान के सामरिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले बंदर अब्बास शहर में अंजाम दी गई। बंदर अब्बास न केवल एक बंदरगाह है, बल्कि यह ईरान की समुद्री ताकत का मुख्य केंद्र भी है, और यहीं तंगसीरी की मौजूदगी के दौरान उन पर प्रलय बनकर हमला हुआ। 

समंदर का वो 'सुल्तान' जिसे इजरायल ने रडार पर लिया
अलीरेजा तंगसीरी महज एक कमांडर नहीं थे, बल्कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की उस आक्रामक रणनीति के दिमाग थे, जिसने सालों से पश्चिमी देशों की नौसेनाओं को तनाव में रखा था। बंदर अब्बास, जहां यह हमला होने का दावा किया जा रहा है, ईरान का वो किला है जहां से वह पूरी फारस की खाड़ी की नब्ज पर हाथ रखता है। अगर इजरायल का यह दावा हकीकत में बदलता है, तो यह तेहरान के लिए किसी बड़े सैन्य सदमे से कम नहीं होगा। यह ईरान की समुद्री ताकत की कमर तोड़ने जैसा है, क्योंकि तंगसीरी ही वो शख्स थे जो अक्सर खुलेआम इजरायल और अमेरिका को समंदर के भीतर दफन करने की धमकियां दिया करते थे।

तेहरान की चुप्पी और बढ़ता सुरक्षा संकट
हैरानी की बात यह है कि जहां एक तरफ इजरायल इस ऑपरेशन को अपनी बड़ी कामयाबी मान रहा है, वहीं ईरान की तरफ से अभी तक रहस्यमयी खामोशी छाई हुई है। तेहरान ने न तो इस खबर का खंडन किया है और न ही इसकी पुष्टि। इतिहास गवाह है कि जब भी ईरान के किसी शीर्ष कमांडर को निशाना बनाया गया है, क्षेत्र में बारूद की गंध और तेज हुई है। अमेरिका और इजरायल अब तक ईरान के लगभग तीन दर्जन से अधिक सैन्य दिग्गजों को रास्ते से हटा चुके हैं, लेकिन तंगसीरी का नाम इस फेहरिस्त में जुड़ना संघर्ष को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले जा सकता है।

क्या अब शुरू होगा जवाबी कार्रवाई का दौर?
बंदर अब्बास जैसे सुरक्षित ठिकाने पर हमला होना ईरान की खुफिया व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, खासकर होर्मुज के आसपास सुरक्षा का खतरा कई गुना बढ़ गया है। 


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Content Editor

Anu Malhotra

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