दमन और गोलियों से उबल रहा PoK: प्रदर्शनकारियों की पाक सेना को खुली चुनौती, कहा-"भारत के रास्ते खोलो" (Video)

punjabkesari.in Wednesday, Jun 17, 2026 - 02:32 PM (IST)

International Desk: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ती महंगाई, बिजली और आटे की ऊंची कीमतों, बेरोजगारी तथा राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। हाल के दिनों में क्षेत्र में हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई झड़पें हुईं। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की जा रही है। इस माहौल में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं ने सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना और उसके प्रमुख Asim Munir की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

 

"भारत या पाकिस्तान "
रावलकोट में आयोजित एक जनसभा में JAAC के नेताओं ने कहा कि यदि पाकिस्तान क्षेत्र के लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, आर्थिक अवसर और बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध नहीं करा सकता, तो भारत के साथ व्यापारिक मार्ग खोलने पर विचार किया जाना चाहिए। JAAC के प्रमुख नेताओं में शामिल सरदार अमान ने कहा कि लोगों को आर्थिक रूप से अलग-थलग नहीं रखा जा सकता। उन्होंने मांग की कि सभी व्यापारिक मार्ग खोले जाएं, चाहे वे पाकिस्तान के माध्यम से हों या भारत के जरिए। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार आंदोलनकारी नेतृत्व खुले तौर पर भारत के साथ व्यापारिक संपर्क बहाल करने की मांग करता दिखाई दे रहा है।

 

"अपने भविष्य का फैसला हम खुद करेंगे"
रैली में नेताओं ने यह भी कहा कि क्षेत्र के लोगों को अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में स्वयं निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के उस तर्क को चुनौती दी कि उसकी मौजूदगी कश्मीरियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि स्थानीय जनता को अपने हितों और क्षेत्रीय नीतियों पर अधिक अधिकार मिलना चाहिए तथा बाहरी हस्तक्षेप कम होना चाहिए। JAAC नेताओं ने पाकिस्तान सरकार पर क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के शोषण का आरोप लगाया। उनका कहना है कि PoK के जल, खनिज और अन्य संसाधनों का उपयोग तो किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय विकास, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर पर्याप्त निवेश नहीं हो रहा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जो लोग इन मुद्दों को उठाते हैं, उन्हें सुरक्षा के नाम पर दबाने की कोशिश की जाती है।

 

आरक्षित सीटों को लेकर  बढ़ा विवाद
PoK की 45 सदस्यीय विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इन सीटों का उपयोग राजनीतिक संतुलन प्रभावित करने और स्थानीय जनमत को कमजोर करने के लिए किया जाता है।27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है। प्रदर्शनकारी इन सीटों की व्यवस्था में बदलाव और स्थानीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि PoK में उठ रही आर्थिक, राजनीतिक और प्रशासनिक मांगें पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए नई चुनौती बनती जा रही हैं। महंगाई, बेरोजगारी और संसाधनों के बंटवारे को लेकर बढ़ता असंतोष अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक अधिकारों और स्वायत्तता की मांग से भी जुड़ गया है।
 
 


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Content Writer

Tanuja

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