Petrol Diesel Excise Duty: पेट्रोल- डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती, पर क्या सस्ते होंगे दाम?

punjabkesari.in Friday, Mar 27, 2026 - 12:39 PM (IST)

Petrol Diesel Excise Duty: खाड़ी देशों में छिड़ी जंग और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी ने पूरी दुनिया में ईंधन की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क में भारी कटौती का एलान किया है। सरकार का यह फैसला 26 मार्च 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गया है।

टैक्स में भारी कटौती: तेल कंपनियों को सहारा
युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल की लक्ष्मण रेखा पार कर चुका है, जिससे भारतीय तेल कंपनियां भारी घाटे में चल रही थीं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाले 13 रुपये के अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को घटाकर मात्र 3 रुपये कर दिया है। वहीं, डीजल पर लगने वाले 10 रुपये के पूरे टैक्स को खत्म कर शून्य कर दिया गया है। इसके अलावा, साल 2022 से लागू विंडफॉल टैक्स को भी पूरी तरह हटा लिया गया है, जिससे घरेलू तेल उत्पादक कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

हवाई सफर होगा महंगा, ATF पर लगा नया टैक्स
जहाँ एक तरफ सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए टैक्स घटाया गया है, वहीं हवाई सफर करने वालों के लिए बुरी खबर है। सरकार ने पहली बार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमानों के ईंधन पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने का फैसला किया है। शुरुआत में इसे 50 रुपये प्रति लीटर तय किया गया था, लेकिन फिलहाल छूट के बाद इसकी प्रभावी दर 29.5 रुपये प्रति लीटर रहेगी। हवाई ईंधन पर टैक्स बढ़ने से आने वाले दिनों में विमान टिकटों के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

क्या आपके शहर में सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?
भले ही सरकार ने टैक्स में 10 रुपये तक की कटौती की है, लेकिन आम आदमी के लिए पेट्रोल पंपों पर कीमतें कम होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ चुकी हैं कि तेल कंपनियां हर लीटर पर करीब 48.8 रुपये का नुकसान झेल रही हैं। सरकार द्वारा दी गई इस टैक्स राहत का इस्तेमाल कंपनियां अपने इसी घाटे की भरपाई के लिए करेंगी। यानी, यह कटौती आम जनता की जेब बचाने से ज्यादा तेल कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने की एक कोशिश है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
दुनिया भर का लगभग 20 से 25 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में गैस होर्मुज के समुद्री मार्ग से गुजरती है। ईरान-इजरायल तनाव के चलते इस रास्ते पर लगी नाकाबंदी ने भारत जैसे तेल आयातक देश के सामने ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। सरकार के इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करना और निर्यात को बढ़ावा देना है, ताकि संकट के इस दौर में अर्थव्यवस्था की रफ्तार थमे नहीं।


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Content Editor

Anu Malhotra

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