मेहनत को सलाम! हाथों से नहीं पैरों से लिख दी किस्मत, 600 में से 600 नंबर हासिल कर किया कमाल
punjabkesari.in Thursday, Apr 16, 2026 - 04:23 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कहते हैं कि "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।"हाल ही में इस कहावत को राजस्थान के अलवर जिले की रहने वाली पायल यादव ने सच कर दिखाया है। पायल ने अपनी शारीरित कमजोरी को कमजोरी न समझते हुए बोर्ड की परीक्षा में 100% अंक हासिल करते हुए इतिहास रचा है। पायल ने यह परीक्षा अपने पैरों से लिखी है।
हादसे नहीं छीन पाया हौसला
पायल जब 6 साल की थीं तो उस समय खेलते- खेलते वह एक हाई-टेंशन बिजली की लाइन की चपेट में आ गईं। इस हादसे में उसके दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए। डॉक्टरों के उसकी जान बचाने के लिए हाथ काटने पड़े। एक नन्ही बच्ची के लिए यह किसी अंधेरे से कम नहीं था, लेकिन पायल ने नियति के सामने घुटने टेकने से इनकार कर दिया।

पैरों को बनाया अपनी ताकत
इस दर्दनाक हादसे के बाद परिवार ने पायल को नकली हाथ लगवाने की कोशिश की, लेकिन उन हाथों में पायल को अपनेपन का अहसास नहीं हुआ। पायल ने दो महीने के अंदर ही अपने नकली हाथ उतार कर पैरों से काम करने की आदत डाल ली। शुरुआत में पैरों से पेंसिल पकड़ना और लिखना बेहद दर्दनाक और कठिन था, लेकिन लगातार कोशिश और अटूट इच्छाशक्ति ने उनके पैरों को ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना दिया।
100% अंकों के साथ रचा इतिहास
पायल की मेहनत तब रंग लाई जब बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आए। हर विषय में 100% हासिल करना किसी आम छात्र के लिए भी बड़ी चुनौती होती है, लेकिन पैरों से लिखने वाली पायल ने 600 में से 600 अंक हासिल कर सबको दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। दरअसल पायल IAS बनना चाहती हैं और वे चाहती हैं कि वे अपने जैसे बच्चों की सहायता करे।

समाज के लिए बनी मिसाल
पायल के टीचर्स और माता-पिता का कहना है कि पायल ने कभी हार नहीं मानीं। उनकी सफलता ने समाज को यह संदेश दिया है कि दिव्यांगता केवल एक शारीरिक अवस्था है, यह मानसिक सीमा नहीं है। पायल यादव आज उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की एक किरण हैं, जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेते हैं।
