CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी! विपक्ष के 193 सांसदों ने दिया प्रस्ताव का नोटिस
punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 06:35 PM (IST)
नेशनल डेस्क: देश की राजनीति में एक बड़ा विवाद सामने आया है। विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA alliance ने मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव के नोटिस पर 193 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें 130 लोकसभा और 63 राज्यसभा सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं। यह संख्या प्रस्ताव लाने के लिए जरूरी न्यूनतम समर्थन से काफी अधिक है।
बताया जा रहा है कि यह नोटिस 13 मार्च 2026 तक संसद के दोनों सदनों में पेश किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार किसी कार्यरत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव लाया जाएगा।
CEC पर विपक्ष के मुख्य आरोप
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। नोटिस में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर पद पर रहते हुए एक राजनीतिक दल के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप। चुनाव से जुड़े विवादों और कथित धांधली की जांच को आगे न बढ़ाने का आरोप। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप।
विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाले कई अन्य आरोप भी शामिल किए गए हैं।इन आरोपों को लेकर विपक्ष पहले भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
भारतीय संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना बेहद कठिन प्रक्रिया है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
इस प्रक्रिया में निम्न चरण शामिल होते हैं:
- संसद के किसी भी सदन में हटाने का प्रस्ताव नोटिस के रूप में दिया जाता है।
- लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति द्वारा नोटिस स्वीकार किए जाने पर जांच की प्रक्रिया शुरू होती है।
- इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई जाती है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज, किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
- यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना जरूरी होता है।
- इस विशेष बहुमत में सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई मत शामिल होते हैं।
किन दलों का समर्थन?
सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को Trinamool Congress, Indian National Congress समेत INDIA गठबंधन के कई दलों का समर्थन मिला है। इसके अलावा Aam Aadmi Party के सांसदों ने भी इस कदम का समर्थन किया है, हालांकि पार्टी अब औपचारिक रूप से गठबंधन का हिस्सा नहीं मानी जाती। इस मुद्दे को आगे बढ़ाने में तृणमूल कांग्रेस की भूमिका प्रमुख बताई जा रही है।
राजनीति में बढ़ेगा टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में संसद और देश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। हालांकि सरकार के पास संसद में मजबूत बहुमत होने के कारण इस प्रस्ताव का पारित होना आसान नहीं माना जा रहा।
