ऑफ द रिकॉर्डः ‘कुंभ का समापन’ करवाने के लिए विश्व हिंदू परिषद ने लगाई ताकत

2021-04-21T06:05:52.57

नई दिल्लीः साधुओं, विभिन्न अखाड़ों व हिंदू संतों के मार्गदर्शक मंडल के सदस्यों में मतभेद के कारण पवित्र कुंभ के औपचारिक समापन में विलंब हो गया है। यद्यपि सबसे बड़े जूना अखाड़ा, आनंद अखाड़ा व निरंजन अखाड़ा समेत 12 प्रमुख अखाड़ों ने कुंभ को प्रतीक के रूप में बदलने के अपने निर्णयों की घोषणा कर दी है, परंतु कुछ प्रमुख साधुओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान मानने से इंकार कर दिया है। 

प्रधानमंत्री ने शनिवार को भावनापूर्ण आह्वान किया था कि कोरोना वायरस संकट को देखते हुए कुंभ मेला अब प्रतीक रूप में ही हो। उन्होंने जूना अखाड़ा परिषद के प्रमुख स्वामी अवधेशानंद से भी फोन पर बात की थी। विश्व हिंदू परिषद व मार्गदर्शक मंडल पिछले 2 दिन से सभी अखाड़ों व साधुओं को कुंभ मेला समय से पहले समाप्त करने के लिए मना रहे हैं। कोरोना से 2 साधुओं की मौत हो चुकी है तथा विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार इस सप्ताह गंगा में पवित्र डुबकी लगाने के बाद संक्रमित हो गए हैं। 

आलोक कुमार ने मार्गदर्शक मंडल के सदस्यों व साधुओं से कुंभ मेला समाप्त करने के लिए टैलीफोन पर कई बार बात की है। इतना करने पर भी कई अखाड़े कुंभ समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि यह आस्था का प्रश्न है। आलोक कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री  की अपील  के  बाद सभी अखाड़ों व साधुओं को मनाने के प्रयास जारी हैं। 

उन्होंने कहा कि इस  विषय  पर मार्गदर्शक मंडल मंथन कर रहा है तथा सर्वसम्मति बन रही है। दो शाही स्नान पूर्ण हो चुके हैं तथा एक अभी शेष है। कुंभ 30 अप्रैल को औपचारिक रूप से समाप्त होना है। यह कुंभ जनवरी के बजाय एक माह पहले आरंभ हुआ था। यह प्रस्ताव दिया जा रहा है कि सीमित संख्या में उपस्थिति के साथ ‘शाही सवारी’ प्रतीक रूप में निकाली जाए जो कि कुंभ के समापन का संकेत है।  


Content Writer

Pardeep

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