अयोध्या से दिल्ली रवाना हुए नृपेंद्र मिश्र, राममंदिर के दानपात्र से चोरी मामले में 4 गिरफ्तार
punjabkesari.in Tuesday, Jun 09, 2026 - 06:43 PM (IST)
नेशनल डेस्क: राम मंदिर के दान पात्र से करोड़ों रुपये गबन के आरोप के बीच नृपेंद्र मिश्रा दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। जिसका वीडियो खूब वायरल हो रहा है। हालांकि ट्रस्ट ने इस बात को लेकर सफाई दे चुका है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कोई भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन के आरोप लगाए थे।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आंतरिक लेखा-परीक्षा (ऑडिट) का उल्लेख करते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य और उत्तर प्रदेश मामलों के प्रभारी संजय सिंह ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा अब भगवान के चढ़ावे को भी नहीं बख्श रही है।
संजय सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, "प्रभु श्रीराम के नाम पर चंदा चोरी और जमीन घोटालों के बाद अब दानपात्र के चढ़ावे में भी लगभग सात करोड़ रुपये की बड़ी चोरी का मामला सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि "कोयला, गैस, बिजली, स्कूल, अस्पताल और मध्याह्न भोजन का पैसा खाने वाली भाजपा अब भगवान के चढ़ावे को भी नहीं बख्श रही है।
झांसी दौरे पर पहुंचे पंकज चौधरी ने कहा कि यह सरकार का नहीं, बल्कि ट्रस्ट का विषय है। चौधरी ने कहा, "मामले की जांच की जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। बाद में एक कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान चौधरी ने दोहराया कि सपा अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच ट्रस्ट अपने स्तर पर कर रहा है तथा चढ़ावे से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने रविवार को कहा था, "श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता रहता है। इस प्रक्रिया में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ऑडिट की प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है। फिलहाल भी यही प्रक्रिया जारी है और अभी तक कोई विशेष अनियमितता सामने नहीं आई है।
