जम्मू-कश्मीर में भूमि कानूनों में संशोधन पर बोली कांग्रेस: हर चीज को थोपने की प्रक्रिया सही नहीं

2020-10-28T21:35:40.34


नयी दिल्ली: कांग्रेस ने कानूनों में संशोधन कर जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोगों को इस केन्द्र शासित प्रदेश में जमीन खरीदने की अनुमति देने के फैसले को गलत करार देते हुए बुधवार को कहा कि हर चीज को थोपने की प्रकिया लोकतंत्र में ठीक नहीं है। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी कहा कि सरकार ने इस फैसले के संदर्भ में वो सुरक्षा कवच नहीं मुहैया कराए गए हैं, जो हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों को मिले हुए हैं।

 

उन्होंने संवाददाताओं से कहा,'जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाना और जमीन से जुड़ा फैसला गलत है। इस बारे में कांग्रेस कार्य समिति की राय भी स्पष्ट है।' सिंघवी ने यह सवाल भी किया कि सरकार ने जमीन के संदर्भ में फैसला करने के लिए कितना विचार-विमर्श किया? उन्होंने कहा,'समें वो सुरक्षा कवच भी नहीं है, जो हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वोत्तर के प्रदेशों में है। एक चीज बताई गई है कि ये कृषि भूमि के विषय में नहीं है, कृषि को अलग रखा गया है। लेकिन कृषि में भी बदलाव की संभावना को छोड़ दिया गया है।' कांग्रेस नेता ने कहा कि हर चीज को थोपने की प्रकिया गलत है।

 

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370  और 35 ए के निरस्त होने के एक साल बाद कई कानूनों में संशोधन करके जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोगों के लिए केंद्र शासित प्रदेश में जमीन खरीदने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। केन्द्र सरकार की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना में भूमि कानूनों में विभिन्न बदलावों की जानकारी दी गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम में किया गया है, जिसकी धारा १७ से 'राज्य के स्थायी निवासी' वाक्यांश को हटा दिया है।

 

पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-ए को निरस्त करने से पहले, गैर-निवासी जम्मू-कश्मीर में कोई अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते थे। हालांकि, ताजा बदलावों ने गैर-निवासियों के लिए केंद्र शासित प्रदेश में जमीन खरीदने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।


Content Writer

Monika Jamwal

सबसे ज्यादा पढ़े गए

Recommended News

static