नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा बाद हालात नाजुक, भारत की सीमा से सटे 2 जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू

punjabkesari.in Thursday, Jul 30, 2026 - 06:53 PM (IST)

Kathmandu: नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भारत के बिहार से सटे सिराहा और सुनसरी जिलों के कई इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। सिराहा जिला प्रशासन ने गुरुवार दोपहर 2 बजे से अगले आदेश तक कर्फ्यू लागू करने की घोषणा की। प्रशासन ने कहा कि सांप्रदायिक तनाव और हिंसा फैलने की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

26 जुलाई को सुनसरी जिले के कप्तानगंज क्षेत्र में सावन महीने के बोलबम यात्रा के दौरान हिंदू श्रद्धालु पवित्र जल लेकर डीजे के साथ गुजर रहे थे। पुलिस के अनुसार, तेज संगीत को लेकर कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों में बहस शुरू हुई और देखते ही देखते मामला हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों समुदायों के लोग लाठी, पत्थर, लोहे की रॉड और अन्य हथियारों के साथ आमने-सामने आ गए। हालात बेकाबू होने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इस दौरान पुलिस की गोली लगने से ओम प्रकाश मेहता नामक युवक की मौत हो गई।

 

सुनसरी जिले के इनरुवा, दुहाबी, कोशी, देवानगंज, हरिनगर, गढ़ी, बरजू और भोकराहा नरसिंह सहित कई स्थानीय निकायों में कर्फ्यू लागू है। वहीं, सिराहा जिले के कई संवेदनशील इलाकों में भी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की बैठक हुई, जिसमें देश की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई। परिषद ने सभी सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाने तथा सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का निर्णय लिया।

 

सरकार का कहना है कि राजनीतिक दलों, स्थानीय समुदायों और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन किसी भी नई हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी। नेपाल के प्रमुख समाचार पत्र कांतिपुर ने एक गोपनीय रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि तीन वर्ष पहले सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने सरकार को तराई क्षेत्र में धार्मिक और जातीय तनाव भड़काने की संगठित कोशिशों के बारे में चेताया था। रिपोर्ट में तत्काल राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप की सिफारिश की गई थी, लेकिन उस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
 


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Content Writer

Tanuja

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