नजरियाः यूएन में मोदी ने दिया शांति और विकास का संदेश, इमरान ने उगला जहर

10/1/2019 7:14:18 PM

नेशनल डेस्क (रवि प्रताप सिंह): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यूएन जनरल असेंबली के 74वें सत्र में भारत के मूल विचार को विश्व के सामने रखा। साथ ही दुनिया को स्पष्ट शब्दों में बता दिया है कि भारत ने विश्व को युद्ध नहीं बुद्ध दिए हैं और बुद्ध की विचारधारा का अनुसरण करते हुए भारत ने हमेशा से ही शांति और विकास को प्राथमिकता दी है। 5000 वर्ष का इतिहास उठाए तो प्रधानमंत्री की यह बात अपने आप चरितार्थ है क्योंकि भारत विश्व में अकेला ऐसा बड़ा देश है जिसने कभी भी दूसरे देश पर हमला नहीं किया। वहीं, पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने यूएन में फिर से कश्मीर राग अलापा और दुनिया को इस्लामिक आतंकवाद पर सफाई दी। साथ ही अपनी जहर वाणी से इमरान ने कश्मीर में आतंक को हवा देने की कोशिश की, इमरान ने कहा कि अगर वह कश्मीर में होते तो वह बंदूक उठा लेते। 

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नाम लिए बिना साधा पाक पर निशाना 
अपने 17 मिनट के संबोधन में उन्होंने पाक का नाम लिए बिना आतंकवाद पर भी निशाना साधा और दुनिया को सांकेतिक भाषा में बता दिया कि भारत ने पिछले पांच साल के दौरान अपने देश की जनता के लिए कई लाभकारी योजनाएं चलाई हैं। वहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान दुनिया में आतंकियों को निर्यात कर रहा है जबकि उनके देश में भुखमरी का बोलबाला है। दूसरी तरफ भारत अपने लोगों के स्वास्थ्य, सड़क, स्वच्छता से लेकर गरीब जनता के लिए मकान तक देने की व्यवस्था में जुटा हुआ है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत करीब 50 करोड़ लोग आते हैं जिन्हें बीमारी की हालत में 5 लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई है। बॉयोमीट्रिक पहचान से करीब हर भारतीय को जोड़ा गया। इसी को आधार बनाकर बीते पांच वर्षों में 38 करोड़ लोगों के बैंक अकाउंट खोले गए जो पैसा पहले बिचौलियों और भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ जाता था उसे सीधा लाभार्थी के बैंक में पहुंचाया गया। साथ ही सरकार करीब 20 बीलियन डॉलर (करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये) भ्रष्टाचार से बचाने में कामयाब रही। एक विकासशील देश होते हुए भी भारत ने 2022 तक गरीबों के लिए 2 करोड़ घरों के निर्माण का निर्णय लिया है। 

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विश्व नेताओ को पर्यावरण पर दी नसीहत
दुनिया के सामने अगले पांच साल में भारत क्या करने वाला है, मोदी ने इसका खाका भी पेश किया। पीएम ने कहा कि 2025 तक भारत टीबी से मुक्त करने का सपना है जबकि यूएन ने टीबी मुक्ति के लिए 2030 का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत अगले पांच साल में 15 करोड़ घरों तक पेयजल की व्यव्स्था कर देगा। साथ ही विकास को गति देने के लिए 1.25 लाख किलोमीटर सड़क बनाने का भी लक्ष्य है। मोदी ने दुनिया को यह भी बताया कि जलवायु संकट के लिए भारत ना के बराबर जिम्मेदार है लेकिन वह पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्गदर्शक की भूमिका में है। इसी के चलते ही भारत 450 गिगावाट रिन्यूबल ऊर्जा की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही एक विकासशील देश होते हुए भी भारत ने इंटरनेशनल सोलर एलाइंस में अहम भूमिका निभाई और सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन करने का संकल्प लिया है। इसके माध्यम से भारत ने दुनिया के साथ-साथ अमेरिका और चीन को संदेश दिया है कि औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। दुनिया का सिरमौर बने रहना है तो अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करना होगा।

वर्ष 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार कार्बन डाईआक्साइड का सबसे अधिक उत्सर्जन करने वाले देशों में चीन और अमेरिका क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर आते हैं। चीन 27, अमेरिका 15, यूरोपीय यूनियन 7, भारत 7 और रूस 5 फीसद कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन करते हैं।  

मोदी ने यह भी बताया कि यूएन का गठन जिस मूल उद्देश्य शांति और विकाल के लिए किया गया था। भारत की यही मूल परंपरा रही है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘3000 वर्ष  पूर्व भारत के महान कवि ने विश्व की प्राचीनतम भाषा तमिल में कहा था, हम सभी स्थानों के लिए अपनेपन का भाव रखते हैं  और सभी लोग अपने हैं। देश की सीमाओं से परे अपनत्व की यही भावना भारत भूमि की विशेषता है’।

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मोदी ने यूएन जनरल असेंबली में दिए अपने भाषण से दुनिया को न केवल शांति और विकास का संदेश दिया बल्कि विश्व के अग्रणी देशों को पर्यावरण पर अपनी जिम्मेदारी निभाने की नसीहत भी दी है और भारत को मानव भलाई के मामले में एक अगुवा देश की तरह पेश किया। वहीं, पीएम मोदी के बाद बोलने आए इमरान खान कश्मीर पर सिर्फ जहर उगलते रहे।

 

 

 


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