Gold Prices 10 Gram: क्या फिर से ₹70,000 के नीचे आएगा भाव? जानिए बाजार के बदलते समीकरण
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 03:44 PM (IST)
नेशनल डेस्क: सोने की चाल इन दिनों किसी पहेली जैसी हो गई है। आज दाम गिरते हैं, तो कल फिर चढ़ जाते हैं। इस उतार-चढ़ाव ने उन परिवारों को सबसे ज्यादा उलझन में डाल दिया है जिनके घर में शादियां हैं। हर कोई बस एक ही बात जानना चाहता है कि क्या सोना खरीदने का यह सही समय है या अभी थोड़ा और इंतजार करना फायदेमंद होगा? सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या हम फिर से सोने को 70 हजार रुपये के स्तर से नीचे देख पाएंगे?
डॉलर की मजबूती और ट्रंप फैक्टर
बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने की कीमतों पर दबाव के पीछे सबसे बड़ी वजह सात समंदर पार अमेरिका में हो रही हलचल है। वहां डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों के चलते डॉलर लगातार शक्तिशाली हो रहा है। नियम सीधा है—जब-जब डॉलर मजबूत होता है, सोने की चमक फीकी पड़ने लगती है क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने के बजाय डॉलर को तरजीह देने लगते हैं।
युद्ध का टलता साया और 'प्रॉफिट बुकिंग'
पिछले कुछ सालों से दुनिया रूस-यूक्रेन और मिडिल-ईस्ट के तनाव के कारण डरी हुई थी। संकट के समय लोग सोने में पैसा लगाना सुरक्षित मानते हैं। लेकिन अब जैसे-जैसे युद्ध की आशंकाएं कम हो रही हैं और राजनीतिक स्थिरता लौट रही है, निवेशक सोने से अपना मुनाफा (Profit) निकालकर शेयर बाजार में लगा रहे हैं। इसी 'प्रॉफिट बुकिंग' की वजह से सोने की कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हुआ है।
क्या ₹70,000 का स्तर संभव है?
विशेषज्ञों की मानें तो सोने का 70 हजार रुपये से नीचे जाना अब नामुमकिन नहीं लगता। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें अपने मौजूदा सपोर्ट लेवल को तोड़ती हैं और भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा भी संभलता है, तो घरेलू बाजार में दाम तेजी से नीचे आ सकते हैं। हालांकि, यह बदलाव रातों-रात नहीं होगा, बल्कि धीरे-धीरे टुकड़ों में देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में बाजार में हलचल जारी रहेगी, लेकिन झुकाव गिरावट की तरफ ही रहने के संकेत हैं।
खरीदारों के लिए क्या है सलाह?
अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स की राय है कि जल्दबाजी में सारा पैसा एक साथ न फंसाएं। मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए समझदारी इसी में है कि जब भी कीमतों में थोड़ी गिरावट आए, तो थोड़ा-थोड़ा सोना खरीदते रहें। इस रणनीति से आप भारी उतार-चढ़ाव के जोखिम से बच सकेंगे और भविष्य में बड़ी गिरावट आने पर अपनी जरूरत का मुख्य हिस्सा खरीद पाएंगे।
