Karnataka: सैकड़ों आधार कार्ड पानी में तैरते मिले, सुरक्षा पर बड़ा सवाल
punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 08:22 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कर्नाटक के मंगलुरु से एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है। दक्षिण कन्नड़ जिले के फरंगीपेट इलाके में नेत्रावती नदी के किनारे बड़ी संख्या में आधार कार्ड बिखरे और पानी में तैरते हुए पाए गए। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ गई है।
नदी किनारे दिखे सैकड़ों आधार कार्ड
3 मार्च 2026 को फरंगीपेट के पुडु गांव के पास नेत्रावती नदी के किनारे घूम रहे कुछ स्थानीय लोगों की नजर अचानक कई आधार कार्डों पर पड़ी। कार्ड नदी के किनारे बिखरे हुए थे और कुछ पानी में बह रहे थे। घटना की जानकारी तुरंत पुडु ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को दी गई। सूचना मिलते ही पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और नदी किनारे पड़े कार्डों को इकट्ठा करना शुरू किया।
कई लोगों के कार्ड मिले
ग्रामीणों के अनुसार, मिले हुए आधार कार्डों में पुडु गांव और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के कार्ड शामिल हैं। कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अपने आधार में नाम या पता अपडेट कराने के लिए आवेदन किया था और नए कार्ड का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनके कार्ड नदी किनारे मिले।
डाक विभाग पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि आधार कार्ड सही पते पर पहुंचाने में लापरवाही बरती गई है।
लोगों का आरोप है कि संभवतः डिलीवरी के दौरान कार्डों को सही तरीके से वितरित करने के बजाय फेंक दिया गया। इससे आधार धारकों की निजी जानकारी के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
विधानसभा अध्यक्ष ने मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलुरु क्षेत्र के विधायक और कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने 4 मार्च को आधार प्राधिकरण (UIDAI) के बेंगलुरु स्थित प्रोजेक्ट मैनेजर को पत्र भेजकर इस मामले की विस्तृत जांच कराने को कहा। खादर ने अधिकारियों से पूछा है कि इतनी बड़ी संख्या में आधार कार्ड नदी के किनारे कैसे पहुंचे और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
यू.टी. खादर ने निर्देश दिया है कि मामले की विभागीय जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। यह घटना आधार कार्ड वितरण व्यवस्था में संभावित खामियों की ओर इशारा करती है और नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
