ममता बनर्जी ‘शेरनी'' हैं, वह झुकेंगी नहीं: महबूबा मुफ्ती
punjabkesari.in Friday, Jan 09, 2026 - 05:48 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘‘शेरनी'' बताते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ‘‘बहुत बहादुर'' हैं और वह झुकेंगी नहीं। मुफ्ती बृहस्पतिवार को कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म ‘आई-पैक' के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी पर प्रतिक्रिया दे रही थीं। इस कार्रवाई से उस वक्त काफी हंगामा मच गया, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री छापेमारी स्थल पर पहुंचीं और उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी राज्य चुनावों से पहले तृणमूल के संवेदनशील डेटा को जब्त करने की कोशिश कर रही थी। मुफ्ती ने कहा कि यद्यपि जम्मू कश्मीर में ईडी या अन्य जांच एजेंसियों द्वारा इस तरह की छापेमारी एक सामान्य बात हो गई है, लेकिन ‘‘पूरा देश अब इसका स्वाद चख रहा है''।

उन्होंने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किये जाने के बाद खुद की, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के संदर्भ में कहा, ‘‘जब अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया, तब छापे मारे गए थे और तीन मुख्यमंत्रियों को जेल में डाला गया था, उस वक्त अधिकांश राजनीतिक दलों ने चुप्पी साधे रखी। अब यही स्थिति पूरे देश में देखने को मिल रही है।'' पीडीपी प्रमुख ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि बनर्जी बहुत बहादुर हैं, वह एक शेरनी हैं और वह प्रभावी ढंग से उनका मुकाबला करेंगी और आत्मसमर्पण नहीं करेंगी।'' जम्मू क्षेत्र के लिए अलग राज्य की मांग के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा कदम सही नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू में जो माहौल बनाया जा रहा है, उसका मतलब यह होगा कि वे जिन्ना के द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को खारिज करके भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय के फैसले को नकार देंगे। अगर वे धर्म के आधार पर जम्मू कश्मीर को विभाजित करते हैं, तो इसका मतलब होगा कि जिन्ना सही थे। अगर ऐसा होता है, तो यह बहुत गलत फैसला होगा।'' जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी चिकित्सा उत्कृष्टता संस्थान को बंद किए जाने का जिक्र करते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि यह गलत था और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए था।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ माता वैष्णो देवी कॉलेज का मामला नहीं है, यह एक प्रयोग होने के कारण एक मिसाल बन सकता है। जम्मू कश्मीर में किए गए सभी प्रयोग पूरे देश में लागू किए गए हैं। अफसोस की बात है कि अब्दुल्ला ने एक दिन पहले ही कॉलेज बंद करने की बात कही। क्या मुख्यमंत्री से इस बारे में पहले ही चर्चा हो चुकी थी कि उन्होंने यह बात कही और फिर एक दिन बाद आदेश जारी कर दिया गया?'' उन्होंने कहा कि अब सवाल कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों के स्थानांतरण का नहीं है, क्योंकि यह सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि इसके प्रभाव का है।

मुफ्ती ने पूछा, ‘‘अगर यही सिलसिला दूसरे स्थानों पर भी दोहराया गया और धर्म के नाम पर शिक्षा का राजनीतिकरण किया गया, तो क्या होगा? अगर हमारे युवाओं, विशेषकर मुस्लिम युवाओं को जम्मू कश्मीर में जगह नहीं मिली, तो हरियाणा या अन्य राज्यों में क्या होगा? अगर परिवार के सदस्यों को उनके ही घर से निकाल दिया गया, तो दूसरे क्या करेंगे?'' उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से गलत फैसला है और हमारे मुख्यमंत्री को इसका विरोध करना चाहिए था। उन्हें इस मामले को केंद्र सरकार के सामने उठाना चाहिए था, क्योंकि यह फैसला केवल कश्मीरी मुस्लिम छात्रों को निष्कासित करने के लिए लिया गया था।'' मुफ्ती ने कहा कि यह कदम अन्य स्थानों पर सांप्रदायिक ताकतों को प्रोत्साहित कर सकता है और वे इसे दोहरा सकते हैं।
