महात्मा गांधी के परिवार से इस सदस्य का हुआ निधन, शोक की लहर दौड़ी

punjabkesari.in Wednesday, Apr 02, 2025 - 08:01 AM (IST)

नेशनल डेस्क:  महात्मा गांधी की परपोती नीलमबेन परीख का 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई और सभी गमगीन दिखें। उन्होंने गुजरात के नवसारी जिले में अंतिम सांस ली। नीलमबेन गांधी जी के पुत्र हरिदास गांधी की पोती थीं और अपने जीवन के अंतिम समय में नवसारी की अलका सोसायटी में अपने बेटे डॉ. समीर परीख के साथ रह रही थीं। उनका अंतिम संस्कार वीरवाल श्मशान घाट पर किया जाएगा, जहां परिवार के सदस्य और उनके करीबी लोग उन्हें अंतिम विदाई देंगे।

एक सच्ची गांधीवादी थीं नीलमबेन परीख

नीलमबेन परीख ने अपना पूरा जीवन व्यारा में बिताया और हमेशा महिला कल्याण और मानव सेवा के लिए समर्पित रहीं। उन्होंने गांधीवादी सिद्धांतों का पालन करते हुए अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया। उनके योगदान के कारण स्थानीय समुदाय में उन्हें बहुत सम्मान प्राप्त था। उन्होंने कई सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेष रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्य किए।

बापू की अंतिम अस्थियों का किया था विसर्जन

नीलमबेन परीख का नाम इतिहास में इसलिए भी खास रहेगा क्योंकि उन्होंने महात्मा गांधी की 60वीं पुण्यतिथि पर उनकी अंतिम बची हुई अस्थियों का सम्मानपूर्वक विसर्जन किया था। यह विसर्जन 30 जनवरी 2008 को मुंबई के पास अरब सागर में संपन्न हुआ था। इस मौके पर गांधी जी के परिवार के सदस्य और उनके अनुयायी मौजूद थे। यह घटना उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही और गांधी जी के विचारों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाती है।

महात्मा गांधी के विचारों की जीवंत मिसाल

नीलमबेन परीख सिर्फ गांधी जी की परपोती ही नहीं थीं, बल्कि उनके आदर्शों की सच्ची प्रतिनिधि भी थीं। उन्होंने हमेशा सत्य, अहिंसा और समानता के सिद्धांतों का पालन किया। उनके निधन से समाज को एक ऐसी शख्सियत खोनी पड़ी है, जो पूरी तरह से गांधीवादी जीवनशैली में विश्वास रखती थीं।

 


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Content Editor

Ashutosh Chaubey

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