इसरो की बड़ी कामयाबी: ''स्मार्ट बॉय'' GSLV-F17 ने EOS-05 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में किया स्थापित, भारत को मिलीं ''नई आंखें''
punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 05:58 AM (IST)
श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को लॉन्च पैड पर धमाकेदार वापसी करते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। लगभग आठ महीनों के लंबे इंतजार के बाद, इसरो के GSLV-F17 रॉकेट ने श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी और EOS-05 (जिसे GISAT-1A भी कहा जाता है) सैटेलाइट को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। यह जनवरी 2026 में हुए PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के बाद इसरो का पहला प्रक्षेपण है, जिसने अंतरिक्ष एजेंसी के लंबे सूखे को समाप्त कर दिया है।
तड़के 2:55 बजे भरी उड़ान, 18 मिनट में लक्ष्य हासिल
GSLV की यह 19वीं उड़ान थी, जिसने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से तड़के 2:55 बजे (IST) उड़ान भरी। 'स्मार्ट बॉय' के नाम से मशहूर इस रॉकेट ने लॉन्च के ठीक 18 मिनट बाद उपग्रह को उसकी तय कक्षा में पहुंचा दिया। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "GSLV-F17 ने EOS-05 उपग्रह को पूरी सटीकता के साथ उसकी कक्षा में स्थापित किया है। आज हमने GSLV के जरिए अपने सबसे भारी उपग्रह को भेजा है। पूरी तरह सक्रिय होने के बाद, यह भू-समकालिक कक्षा (जियो ऑर्बिट) से भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट बनेगा, जो देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा प्रदान करेगा"।
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh: ISRO successfully launches the GSLV-F17/EOS-05 mission from the Second Launch Pad at Satish Dhawan Space Centre. The launch vehicle places EOS-05, from Geosynchronous orbit, into a Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO). pic.twitter.com/xD0YMmdMEf
— ANI (@ANI) September 3, 2026
36,000 किमी की ऊंचाई से हर पल रखेगा नजर
यह मिशन भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव है। आम रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट पृथ्वी से कुछ सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर रहकर समय-समय पर ही किसी क्षेत्र के ऊपर से गुजरते हैं। इसके विपरीत, EOS-05 पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर जियोसिंक्रोनस कक्षा में तैनात रहेगा, जहां से यह लगातार भारत के एक बड़े हिस्से पर अपनी नजर बनाए रख सकता है।
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh: ISRO successfully launches the GSLV-F17/EOS-05 mission from the Second Launch Pad at Satish Dhawan Space Centre.
— ANI (@ANI) September 3, 2026
(Source: ISRO) pic.twitter.com/4Dc9ahTHpu
बाढ़, चक्रवात और सीमाओं की निगरानी में मिलेगी मदद
लगातार नजर रखने की यह अनूठी क्षमता बाढ़, चक्रवात, जंगलों की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी तेजी से बदलने वाली परिस्थितियों में वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए बेहद मददगार साबित होगी। इसके अलावा, यह सीमा की निगरानी (बॉर्डर मॉनिटरिंग), पर्यावरण पर नजर रखने और कृषि क्षेत्र के लिए रणनीतिक डेटा प्रदान करेगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले अगस्त 2021 में भारत ने इस श्रृंखला के पहले सैटेलाइट EOS-03 (GISAT-1) को भेजने का प्रयास किया था, लेकिन वह मिशन असफल रहा था। ऐसे में GSLV-F17 की यह सफलता इसरो के लिए बेहद खास और गर्व का विषय है।
