''तारीख पर तारीख'' का दौर खत्म, FIR से SC तक 3 साल में मिलेगा न्याय: अमित शाह

punjabkesari.in Saturday, Oct 03, 2026 - 04:39 PM (IST)

भोपालः केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था कभी 'तारीख पर तारीख' के लिए जानी जाती थी, लेकिन नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर उच्चतम न्यायालय तक तीन साल में न्याय दिलाने का पूरा काम हो जाएगा।

राज्य की राजधानी भोपाल के भेल इलाके में स्थित दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों पर केंद्रित राज्यस्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में शामिल होगी। शाह ने देशभर में नशे के खिलाफ जारी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिससे 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्यप्रदेश में नशे के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।

उन्होंने कहा, भारत की न्याय व्यवस्था कभी 'तारीख पर तारीख' के तानों के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर उच्चतम न्यायालय तक तीन वर्ष में न्याय दिलाने का पूरा काम हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तीन नए कानूनों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाहित करते हुए फॉरेंसिक जांच के प्रावधान किए गए हैं और इनके माध्यम से महिला सुरक्षा, 'मॉब लिंचिंग' (भीड़ हिंसा), गुमशुदा बच्चों और आतंकवाद से नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान किए गए हैं। भारत में एक जुलाई 2024 को भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम प्रभावी हुए थे।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानून उनके शासन को बचाने के लिए थे, जबकि तीन नए आपराधिक कानून भारत के नागरिकों के सम्मान, संपत्ति और शरीर की रक्षा के लिए हैं। शाह ने कहा, इन कानूनों का मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं। दंड का प्रावधान केवल अपराधियों को अपराध करने से रोकने के लिए है। इन कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद हमारी आपराधिक न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में शामिल होगी। शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आजादी के बाद से कृषि व्यवस्था, ग्रामीण विकास और सहकारिता से जुड़े लोग अलग सहकारिता मंत्रालय की मांग करते रहे, लेकिन तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी ने 75 वर्षों तक अलग सहकारिता मंत्रालय नहीं बनने दिया।

उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर सहकारिता क्षेत्र को नयी दिशा दी। इसका सबसे बड़ा लाभ हमारे गोपालकों को मिलेगा। खुले बाजार में दूध बेचने पर बिचौलिए लाभ का बड़ा हिस्सा ले जाते हैं, लेकिन सहकारिता मॉडल में उनके लिए कोई जगह नहीं बची है। शाह ने सम्मेलन में बड़ी संख्या में पहुंचे गोपालकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश में 'श्वेत क्रांति 2.0' के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन क्षेत्र महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण विकास और आर्थिक विकास का मजबूत माध्यम है और यह कुपोषण से लड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार का विरोध करने वाले कांग्रेस नेताओं के सवालों का हिसाब देने वह यहां आए हैं।

उन्होंने कहा, कांग्रेस के 75 वर्षों के शासन में देश का दूध उत्पादन 14.60 करोड़ टन तक पहुंचा, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में यह बढ़कर 25 करोड़ टन तक पहुंचा है। इसके पीछे भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों की निरंतर मेहनत है। शाह ने कहा कि देश में 2013-14 में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 307 ग्राम थी, जो बढ़कर 485 ग्राम हो गई है। उन्होंने कहा, भारत आज दुनिया में सबसे अधिक दूध उत्पादन वाला देश है। देश के पांच प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भाजपा की सरकारें हैं। कांग्रेस ने अपने शासन में पशुपालकों के कल्याण के लिए क्या किया, इसका जवाब उसे देना चाहिए। हमारी सरकारों का ध्यान पशुपालकों की आय बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर है।

उन्होंने कहा कि गोबर के वैज्ञानिक संग्रह, मीथेन उत्सर्जन में कमी तथा पोषक तत्वों के उपयोग के लिए पांच मॉडल तैयार किए गए हैं और आने वाले दिनों में ऐसा मॉडल बनाया जाएगा, जिससे मध्यप्रदेश के हर गांव के गोबर का उचित मूल्य मिल सके। इस अवसर पर उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिदिन तीन लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता वाले संयंत्र का भूमिपूजन किया गया। वहीं, भोपाल दुग्ध संघ में 17 करोड़ रुपये की लागत से 40 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता वाला संयंत्र स्थापित किया गया। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sahil Kumar

Related News