ISRO का न तो निजीकरण होगा और न ही महत्व घटेगा: अफवाहों पर स्पेस एजेंसी ने दिया स्पष्टीकरण
punjabkesari.in Sunday, Sep 06, 2026 - 10:37 PM (IST)
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश के स्पेस सेक्टर में हो रहे सुधारों के बीच अपनी भविष्य की भूमिका को लेकर मीडिया में चल रही अटकलों और अफवाहों पर रविवार को एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। स्पेस एजेंसी ने साफ तौर पर कहा है कि वह भारत के स्पेस प्रोग्राम के केंद्र में बनी हुई है और राष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करती रहेगी।
Clarification regarding media reports on concerns relating to Space Sector Reforms and the role of ISRO
— ISRO (@isro) September 6, 2026
ISRO’s Next Chapter: Leading India’s National Space Ecosystem
There has been considerable reporting in parts of the media around the future role of ISRO including speculations…
अफवाहें पूरी तरह बेबुनियाद और गलत
ISRO इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों में इसरो के निजीकरण करने या उसकी भूमिका को कम करने को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही थी। स्पेस एजेंसी ने इन सभी दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है। इसरो ने स्पष्ट किया कि न तो इसरो का निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कभी कम होगा। यह संस्था देश के एडवांस्ड स्पेस रिसर्च, रणनीतिक मिशनों, स्पेस साइंस और खोज के लिए भारत की मुख्य संस्था बनी रहेगी।
प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से बढ़ेगी ताकत
इसरो ने स्पष्ट किया कि स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) की भागीदारी का मतलब इसरो की भूमिका को कम करना बिल्कुल नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य इसरो को भारत के स्पेस प्रोग्राम की अगली पीढ़ी की तकनीकों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद करना है, जबकि मैच्योर हो चुकी तकनीकों को बढ़ाने का काम इंडस्ट्री करेगी। बदलाव इसरो के महत्व में नहीं, बल्कि भारत के स्पेस इकोसिस्टम के पैमाने और ढांचे को बड़ा बनाने के लिए हो रहा है।
'स्पेस विजन 2047' को साकार करने की तैयारी
साल 2020 से शुरू किए गए सुधारों, इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023 और एफडीआई (FDI) नीति में ढील का मकसद एक मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना है। इसरो का कहना है कि उद्योगों और स्टार्ट-अप को स्पेस वैल्यू चेन में शामिल करने से इसरो की क्षमताएं और मजबूत होंगी।
इसरो के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों को अब अगली पीढ़ी की लॉन्च टेक्नोलॉजी, मानव अंतरिक्ष-उड़ान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रमा और ग्रहों की खोज जैसे जटिल और रणनीतिक राष्ट्रीय मिशनों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। यह पूरा बदलाव वास्तव में 'इसरो के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय स्पेस इकोसिस्टम' की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास है।
