बांग्लादेश में कुछ बड़ा होने वाला है? भारत ने राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाया
punjabkesari.in Tuesday, Jan 20, 2026 - 11:07 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्कः भारत ने बांग्लादेश में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए एक बड़ा और एहतियाती फैसला लिया है। भारत सरकार ने बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों के परिवारों को अस्थायी रूप से वापस बुलाने का निर्णय किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का भारतीय राजनयिक मिशन के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और अन्य सहायक उच्चायोग पहले की तरह पूरी क्षमता के साथ काम करते रहेंगे।
चुनाव से पहले बढ़ी चिंता
यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब बांग्लादेश में कुछ ही हफ्तों बाद संसदीय चुनाव होने वाले हैं। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद यह देश के पहले आम चुनाव होंगे। छात्र आंदोलन के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था, जिसके बाद से ही बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता, विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
In light of the security situation, India has advised dependents of Mission & Post officials in Bangladesh to return home as a precautionary step. The Indian Mission and all Posts continue to remain open and fully operational: Sources
— ANI (@ANI) January 20, 2026
भारत ने जताई थी कड़ी आपत्ति
पिछले महीने भारत सरकार ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को तलब कर ढाका में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। यह कदम तब उठाया गया, जब ढाका में भारतीय उच्चायोग के आसपास प्रदर्शन और नारेबाजी देखने को मिली थी। इन घटनाओं के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव और अविश्वास और गहराता नजर आया।
छात्र नेता की हत्या के बाद भड़का तनाव
बांग्लादेश में हालात उस समय और खराब हो गए, जब छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्या की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन शुरू हुए। बाद में इन आंदोलनों में भारत विरोधी नारे और आरोप भी सामने आए। कुछ छात्र नेताओं ने बिना किसी ठोस सबूत के इस हमले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की।
भारत का सख्त जवाब
इन आरोपों पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा और साफ जवाब दिया। मंत्रालय ने कहा कि कुछ चरमपंथी और भड़काऊ तत्व जानबूझकर झूठी कहानियां फैला रहे हैं ताकि माहौल खराब किया जा सके। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अब तक न तो इस हत्या की पूरी और पारदर्शी जांच की है और न ही भारत के साथ कोई ठोस सबूत साझा किए हैं।
अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा
इस बीच बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले भी चिंता का बड़ा कारण बने हुए हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अल्पसंख्यकों के खिलाफ 645 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं। ये आंकड़े जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच दर्ज पुलिस रिकॉर्ड, एफआईआर, जनरल डायरी, चार्जशीट और जांच रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए हैं।
भारत की सतर्क नजर
भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों, राजनयिकों व उनके परिवारों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। माना जा रहा है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो आने वाले दिनों में भारत सरकार और कड़े सुरक्षा या कूटनीतिक कदम भी उठा सकती है।
