Nuclear Arms Alert: अमेरिका ने ईरान के परमाणु केंद्र ''नतांज'' को बनाया निशाना, जानें कितनी तबाही मचा सकते हैं इन 9 देशों के न्यूक्लियर बम

punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 01:06 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया की आग अब उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां से वापसी का रास्ता धुंधला नजर आता है। ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग के 23वें दिन एक ऐसी खबर आई जिसने वैश्विक शांति की उम्मीदों को हिला कर रख दिया है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु केंद्र 'नतांज' को निशाना बनाया है। यह केवल एक हमला नहीं, बल्कि उस 'पेंडोरा बॉक्स' को खोलने जैसा है जिसके भीतर परमाणु तबाही का जिन्न कैद है। ईद जैसे मुकद्दस मौके पर यरूशलेम के आसमान में मंडराती ईरानी मिसाइलों और इजरायल की भीषण जवाबी कार्रवाई की चेतावनियों ने बता दिया है कि हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां एक छोटी सी चूक पूरी इंसानियत को इतिहास बना सकती है।

बारूद के ढेर पर बैठी मानवता: किसके पास कितनी मौत का सामान?
जब हम परमाणु युद्ध की बात करते हैं, तो यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह जाती। 'बुलेटिन ऑफ एटोमिक साइंटिस्ट्स' के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के 9 देशों ने मिलकर विनाश का एक ऐसा साम्राज्य खड़ा कर लिया है, जिसमें 12,041 परमाणु बम शामिल हैं।

किस देश के पास है कितने परमाणु बम
इस खौफनाक दौड़ में रूस 5,500 बमों के साथ सबसे आगे है, जबकि अमेरिका 5,044 बमों के साथ उसके ठीक पीछे खड़ा है।चीन, फ्रांस और ब्रिटेन की अपनी अलग ताकत है, वहीं दक्षिण एशिया में भारत (172) और पाकिस्तान (170) के बीच की होड़ भी कम डरावनी नहीं है। इजरायल और उत्तर कोरिया जैसे देश भी इस घातक क्लब का हिस्सा हैं। यह जखीरा इतना विशाल है कि दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।

क्या धरती पूरी तरह खत्म हो जाएगी? गणित और हकीकत
अक्सर सवाल उठता है कि क्या ये बम पूरी पृथ्वी को मिटा सकते हैं? वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इंसानियत को खत्म करना और जमीन को भौतिक रूप से नष्ट करना दो अलग बातें हैं। मानवता को पूरी तरह मिटाने के लिए महज 500 मध्यम क्षमता वाले बम ही काफी हैं, जो 8 अरब की आबादी का नामोनिशान मिटा सकते हैं। हालांकि, अगर कोई पूरी भौगोलिक धरती (15 करोड़ वर्ग किमी जमीन) को ही मलबे में तब्दील करना चाहे, तो उसे सवा लाख से ज्यादा बमों की जरूरत होगी। यानी आज का जखीरा धरती को तो शायद बचा ले, लेकिन इंसानी सभ्यता को पत्थर युग में भेजने के लिए जरूरत से ज्यादा है।

पर्दे के पीछे की तैयारी और रूस का 'खतरनाक हाथ'
परमाणु हथियारों की भूख केवल इन 9 देशों तक सीमित नहीं है। ईरान, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे कई मुल्क गुपचुप तरीके से इस रेस में अपनी जगह बना रहे हैं। जापान जैसे देशों के पास तकनीक तो है, पर उन्होंने फिलहाल शांति का चोला ओढ़ा हुआ है।

इन सबके बीच सबसे बड़ा डर रूस का 'डेड हैंड' (Dead Hand) सिस्टम है। यह एक ऐसी स्वचालित मशीन है जो तब भी दुश्मन पर परमाणु हमला कर सकती है जब रूस का पूरा नेतृत्व और कमांड सेंटर तबाह हो चुका हो. यानी अगर रूस पूरी तरह मिट भी जाए, तो उसकी 'लाश' अपने हत्यारे से बदला लेने की ताकत रखती है।

धमाके के बाद का सन्नाटा: परमाणु सर्दी का खौफ
असली तबाही धमाके के साथ खत्म नहीं होगी, बल्कि उसके बाद शुरू होगी। परमाणु विस्फोटों से निकलने वाली राख और काला धुआं सूरज की रोशनी को सालों तक रोक लेगा। इसे 'न्यूक्लियर विंटर' कहा जाता है, जहाँ तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाएगा, फसलें बर्बाद हो जाएंगी और जो लोग धमाके से बच जाएंगे, वे भूख और कड़ाके की ठंड से दम तोड़ देंगे। हिरोशिमा की त्रासदी तो बस एक मामूली इशारा थी, आज के हथियार उस बर्बादी को हजारों गुना ज्यादा भयावह बनाने की क्षमता रखते हैं।


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Content Editor

Anu Malhotra

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