88 करोड़ के निवेश घोटाले में बड़ा एक्शन, मास्टरमाइंड के बाद पत्नी भी UAE से भारत लाई गई
punjabkesari.in Thursday, Aug 06, 2026 - 08:18 AM (IST)
पुणे: 88 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट फ्रॉड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कथित मास्टरमाइंड अविनाश राठौड़ की भारत वापसी के लगभग दो सप्ताह बाद अब उनकी पत्नी और सह-आरोपी विशाखा राठौड़ को भी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लाया गया है। इस कार्रवाई से महाराष्ट्र के हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराध मामले की जांच को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के अनुसार, भारतीय एजेंसियों को वांछित विशाखा राठौड़ के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी किया गया था। CBI, विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) के समन्वित प्रयासों के बाद उन्हें 3 अगस्त को भारत वापस लाया गया। पुणे पहुंचने पर महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
इंटरपोल के सहयोग से हुई वापसी
CBI ने बताया कि भारत के अनुरोध पर इंटरपोल द्वारा रेड नोटिस जारी किए जाने के बाद UAE के अधिकारियों के सहयोग से विशाखा राठौड़ का पता लगाया गया। एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी कार्रवाई का समन्वय किया, जबकि MEA और MHA ने प्रत्यर्पण/डिपोर्टेशन से जुड़ी आवश्यक कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं को पूरा कराया। फिलहाल विशाखा राठौड़ महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत में हैं, जहां उनसे पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, विशाखा राठौड़ और उनके पति अविनाश राठौड़ पर निवेशकों को निश्चित मासिक रिटर्न (Guaranteed Monthly Return) का लालच देकर विभिन्न निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करने का आरोप है। आरोप है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल तय उद्देश्यों के बजाय कई बैंक और डीमैट खातों के माध्यम से दूसरी जगहों पर ट्रांसफर किया गया। इस कथित वित्तीय घोटाले की रकम करीब 88 करोड़ रुपये आंकी गई है।
पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर निवेशकों की रकम का गबन किया और उसके बाद देश छोड़कर फरार हो गए।
पहले पति अविनाश राठौड़ की हुई थी वापसी
विशाखा राठौड़ की वापसी से पहले उनके पति अविनाश राठौड़ को भी UAE से भारत लाया जा चुका है। जांच एजेंसियां उन्हें इस कथित घोटाले का मास्टरमाइंड मानती हैं। 4 जून 2026 को अविनाश और विशाखा राठौड़, दोनों के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद UAE अधिकारियों ने अविनाश को हिरासत में लेकर 23 जुलाई को भारत डिपोर्ट किया।
मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरते ही पुणे पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने उसे गिरफ्तार कर लिया और बाद में पुणे की अदालत में पेश किया, जिसने पुलिस को उसकी 10 दिन की कस्टोडियल रिमांड दे दी। जांच अधिकारी उससे कथित फाइनेंशियल नेटवर्क और निवेशकों के पैसे के लेन-देन के बारे में पूछताछ कर रहे हैं।
भगोड़े आर्थिक अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज
यह मामला भारत की उस बड़ी मुहिम का हिस्सा है जिसके तहत विदेशों में भाग गए आर्थिक अपराधियों और भगोड़ों को वापस लाया जा रहा है। CBI ने कहा कि वह आपराधिक मामलों में वांछित लोगों का पता लगाने और उन्हें वापस लाने के लिए इंटरपोल और विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है, और इसके लिए तय कानूनी और कूटनीतिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह एजेंसी इंटरपोल के लिए भारत के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के तौर पर काम करती है और 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है।
केंद्र सरकार ने इस हफ़्ते की शुरुआत में संसद को बताया कि विदेशों में भागने वाले अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए चलाए जा रहे तेज़ अभियान के तहत, भारत ने 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को सफलतापूर्वक वापस लाया है।
