नेपाल पहुंचकर फंसे कैलाश मानसरोवर जा रहे यात्री; भारत सरकार ने जारी की सख्त एडवाइजरी, कहा- यात्रा न करें जब तक...
punjabkesari.in Thursday, Aug 06, 2026 - 05:29 PM (IST)
New Delhi: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर भारत सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाल के अधिकारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है, ताकि यात्रा के दौरान भारतीय तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। खास तौर पर दस्तावेजों की कमी, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति और खराब मौसम के कारण आने वाली परेशानियों में दूतावास यात्रियों की मदद कर रहा है।
नेपाल पहुंचकर फंसे यात्री
विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि विदेश मंत्रालय को ऐसे कई भारतीय नागरिकों से सहायता के अनुरोध मिले, जो निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे थे, लेकिन उनके पास जरूरी चीनी वीजा और प्रवेश परमिट नहीं थे। दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण कई यात्री नेपाल में ही फंस गए। इसी को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने 27 जून 2026 को एडवाइजरी जारी कर भारतीय श्रद्धालुओं से कहा था कि जब तक यात्रा के लिए जरूरी सभी दस्तावेज हासिल न हो जाएं, तब तक भारत से अपनी यात्रा शुरू न करें।
यात्रियों के लिए खास चेतावनी
विदेश मंत्रालय ने यात्रियों को खास तौर पर चेताया कि केवल इस उम्मीद में यात्रा शुरू करना कि रास्ते में या बाद में जरूरी परमिट मिल जाएगा, उन्हें गंभीर परेशानी में डाल सकता है। मंत्रालय के अनुसार, बिना पुष्टि वाले दस्तावेजों के यात्रा शुरू करने से नेपाल में फंसने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। सरकार ने श्रद्धालुओं से यह भी कहा है कि वे निजी टूर ऑपरेटर के जरिए यात्रा कर रहे हैं तो पहले यह सुनिश्चित करें कि वह पंजीकृत और अधिकृत है। कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि नेपाल में भारतीय तीर्थयात्रियों को खराब मौसम, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति या दस्तावेजों से जुड़ी परेशानी होने पर भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करता है।
- जरूरत पड़ने पर दूतावास की ओर से यात्रियों के लिए समय पर निकासी की व्यवस्था
- आश्रय और ठहरने की सुविधा, चिकित्सा सहायता
- स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
- सरकार का कहना है कि भारतीय दूतावास का मुख्य उद्देश्य नेपाल में मौजूद भारतीय यात्रियों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है।
पुराने रिकॉर्ड की भी जानकारी दी
संसद में सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के पुराने रिकॉर्ड की भी जानकारी दी। विदेश राज्य मंत्री के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद 2020 से 2024 तक विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा नहीं हो सकी। इसके बाद चीन की ओर से यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं का नवीनीकरण नहीं होने के कारण भी यात्रा प्रभावित रही। भारत सरकार ने इस मुद्दे को चीन के साथ राजनयिक माध्यमों से लगातार उठाया। इसके बाद 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई। सरकार के अनुसार, 2025 में विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा में कुल 688 भारतीय श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। यात्रा को दोबारा शुरू कराने के लिए भारत ने चीन के साथ लगातार कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की थी। कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भारतीय श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सरकार इन सुविधाओं का करती है इंतजाम
राज्यसभा में एक अलग लिखित जवाब में कीर्ति वर्धन सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले व्यक्तिगत यात्रियों को सीधी आर्थिक सहायता, सब्सिडी या खर्च की प्रतिपूर्ति नहीं देती। इसमें वरिष्ठ नागरिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के यात्री भी शामिल हैं। यात्रा को सरकार स्व-वित्तपोषित आधार पर संचालित करती है।विदेश मंत्रालय यात्रा को सुचारु बनाने के लिए कई व्यवस्थाओं में समन्वय करता है। इनमें परिवहन, ठहरने की व्यवस्था, भोजन, मेडिकल जांच, गाइड और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा भारत सरकार चीन तथा उत्तराखंड और सिक्किम की राज्य सरकारों के साथ भी समन्वय करती है, ताकि यात्रा का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो सके।
