अमेरिका में बिना किसी टैक्स के बिकेंगे 1.3 बिलियन डॉलर के भारतीय कृषि उत्पाद

punjabkesari.in Sunday, Feb 08, 2026 - 10:43 PM (IST)

नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुआ द्विपक्षीय व्यापार समझौता भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजारों के द्वार पूरी तरह से खोल देगा। इस संधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अमेरिका अब 1.36 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाएगा, जिसमें से विशेष रूप से 1.035 बिलियन डॉलर के कृषि उत्पादों को 'जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ' के दायरे में रखा गया है।

यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय निर्यातकों को एक ऐसी स्थिरता और पूर्वानुमान प्रदान करेगा, जिससे वे बिना किसी बाजार अनिश्चितता के अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेच सकेंगे। वर्तमान में भारत का अमेरिका के साथ कृषि व्यापार में पहले से ही 1.3 बिलियन डॉलर का व्यापार अधिशेष (सरप्लस) है, जिसे यह नया समझौता और अधिक मजबूती प्रदान करने वाला है।

अमरीका में बिना ड्यूटी बिकेंगे भारत के  मसाले, चाय, कॉफी

भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए इस समझौते के दूरगामी परिणाम होंगे, क्योंकि अब भारतीय मसाले, चाय, कॉफी और उनके अर्क सीधे अमेरिकी रसोई तक बिना किसी कर बाधा के पहुंचेंगे। इतना ही नहीं, भारत के फल उत्पादक किसानों के लिए भी यह एक बड़ी जीत है; अब आम, केला, नारियल, नींबू, अमरूद और अनानास जैसे फलों के साथ-साथ उनके पल्प और जूस के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना बहुत आसान हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, काजू, अखरोट, पिस्ता और पाइन नट्स जैसे मेवों के साथ-साथ जौ और नारियल तेल जैसे उत्पादों के निर्यात में भी भारी उछाल आने की उम्मीद है। यह समझौता भारतीय किसानों को विश्व स्तरीय बाजार उपलब्ध कराकर उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

भारत में नहीं बिकेंगे अमरीका के ज्वार,बाजरा,रागी जैसे अनाज

इस समझौते को केवल निर्यात बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि भारत सरकार ने "किसान-हित सर्वोपरि" की नीति अपनाते हुए एक बेहद मजबूत सुरक्षा कवच भी तैयार किया है। देश के सबसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को किसी भी बाहरी खतरे से बचाने के लिए एक विशेष 'छूट श्रेणी'  बनाई गई है।

इस श्रेणी के तहत मांस, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, जीएम फूड, सोया मील, मक्का और ज्वार, बाजरा, रागी जैसे मोटे अनाजों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। इसके साथ ही मूंग, काबुली चना और हरी मटर जैसी दालों तथा तिलहन और शहद को भी इस सुरक्षा दायरे में रखा गया है ताकि घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा से हमारे स्थानीय किसानों को कोई नुकसान न हो। यह कैलिब्रेटेड दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि जहां एक ओर हमें नया बाजार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर हमारे पारंपरिक कृषि आधार पर कोई आंच न आए।

बादाम, अखरोट और मसूर पर लागू होगा टेरिफ रेट कोटा

समझौते की बारीकियों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में उपयोग होने वाले मध्यवर्ती उत्पादों, जैसे कुछ खास तेल और स्टार्च के लिए शुल्क हटाने की प्रक्रिया को 10 वर्षों के लंबे समय में विभाजित किया है, ताकि घरेलू उद्योग को खुद को मजबूत करने का पूरा अवसर मिले।

बादाम, अखरोट और मसूर जैसी वस्तुओं के लिए 'टैरिफ रेट कोटा' लागू किया गया है, जिसके तहत एक निश्चित सीमा तक ही शुल्क में छूट दी जाएगी, जिससे बाजार में अचानक विदेशी माल की बाढ़ आने का कोई खतरा नहीं रहेगा। यह पूरी रणनीति इस तरह बनाई गई है कि घरेलू आपूर्ति को प्रतिस्थापित करने के बजाय केवल मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटा जा सके, जिससे बाजारों में कीमतों की स्थिरता बनी रहे और किसानों को किसी भी प्रकार का मानसिक या आर्थिक तनाव न झेलना पड़े।

निष्कर्ष के रूप में, यह भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कृषि क्षेत्र के लिए एक संतुलित और लाभकारी सौदा है, जो भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दिलाएगा। यह न केवल निर्यात के जरिए विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल भी प्रदान करेगा। बाजार की स्थिरता बनाए रखते हुए और संवेदनशील उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय किसान वैश्विक व्यापार की चुनौतियों से सुरक्षित रहकर इसके लाभों का आनंद ले सकें। यह समझौता वास्तव में भारतीय कृषि को एक वैश्विक पावरहाउस बनाने की दिशा में उठाया गया एक निर्णायक और साहसी कदम है।


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News Editor

Parveen Kumar

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