अमेरिका का बड़ा फैसला: ग्रीन कार्ड धारकों को SBA लोन पर बड़ा झटका, भारतीयों की बढ़ेंगी मुश्किलें !
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 12:12 PM (IST)
Washington: अमेरिका की सरकार ने एक नई नीति लागू की है। इसके तहत अब ग्रीन कार्ड धारक (कानूनी स्थायी निवासी) SBA लोन नहीं ले सकेंगे। यानी जो लोग अमेरिका में रहते हैं लेकिन नागरिक नहीं हैं, वे छोटे व्यवसायों के लिए सरकारी लोन नहीं पा सकेंगे। इस फैसले की डेमोक्रेटिक पार्टी ने कड़ी आलोचना की है। उनके नेताओं का कहना है कि यह निर्णय “नफरत की राजनीति” है और “अमेरिकी सपने” को खत्म करने जैसा है।
नया नियम क्या कहता है?
SBA ने कहा है कि अब किसी भी व्यवसाय को लोन तभी मिलेगा जब उसका 100% मालिकाना हक अमेरिकी नागरिकों के पास हो। अगर किसी व्यवसाय में ग्रीन कार्ड धारक का 1% हिस्सा भी है, तो वह लोन के लिए अपात्र माना जाएगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से लागू होगा। डेमोक्रेट नेता मार्की और निडिया वेलाज़्केज़ ने कहा कि सरकार प्रवासियों के खिलाफ डर और नफरत फैला रही है। उन्होंने कहा कि मेहनती प्रवासी लोगों को सहायता देने की बजाय उन्हें बाहर किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह संदेश देता है कि “अमेरिकी सपना” अब प्रवासियों के लिए नहीं है।
| विवरण | जानकारी |
| प्रभावी तिथि | 1 मार्च, 2026 |
| मुख्य प्रतिबंध | गैर-नागरिक (ग्रीन कार्ड धारक) मालिकाना हक पर रोक |
| प्रभावित वर्ग | प्रवासी उद्यमी, शरणार्थी, और वीज़ा धारक |
| आर्थिक प्रभाव | लोन की संख्या में लगभग 50% की कमी का दावा |
आर्थिक असर क्या होगा?
डेमोक्रेट नेताओं का दावा है कि इस फैसले के कारण SBA लोन की मात्रा में काफी गिरावट आई है। जून से अगस्त 2025 के बीच SBA लोन में 46% की कमी दर्ज की गई। इसके साथ ही यह निर्णय पिछले 25 सालों की नीति को बदल देता है, जिसमें नागरिक और स्थायी निवासी दोनों को समान अवसर मिलते थे। यह नियम केवल ग्रीन कार्ड धारकों को ही नहीं, बल्कि शरणार्थियों, असाइलम प्राप्तकर्ताओं और DACA लाभार्थियों को भी प्रभावित करेगा।
डेमोक्रेटिक पार्टी की तीखी आलोचना व सरकार का तर्क
डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'नफरत की राजनीति' और 'अमेरिकी सपने' पर प्रहार बताया है।क्या है नया नियम?SBA द्वारा 2 फरवरी को प्रकाशित इस नीति के अनुसार:100% नागरिकता अनिवार्य: अब SBA लोन प्राप्त करने के लिए व्यवसाय का 100 प्रतिशत मालिकाना हक अमेरिकी नागरिकों या अमेरिकी नागरिकों के पास होना अनिवार्य है। SBA का कहना है कि यह नियम कानून और एक कार्यकारी आदेश के अनुरूप है, जिसका नाम है “Protecting the American People Against Invasion”। इसके तहत बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि व्यवसाय के मालिक “अपात्र व्यक्ति” न हों।
भारतीय-अमेरिकी उद्यमियों की बढ़ेगी टेंशन
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई लोग अमेरिका में छोटे व्यवसाय चलाते हैं। इस नए नियम से उन्हें SBA लोन नहीं मिल पाएगा। इससे उनके व्यवसाय के विस्तार, निर्माण और मरम्मत पर असर पड़ेगा। कई परिवारों के व्यवसायों में अगर किसी सदस्य के पास ग्रीन कार्ड है, तो वह लोन लेने से रह जाएगा।
स्टार्टअप कल्चर को झटका: सिलिकॉन वैली से लेकर न्यू जर्सी तक, कई टेक स्टार्टअप्स की शुरुआत भारतीय मूल के लोग 'ग्रीन कार्ड' पर रहते हुए करते हैं। अब बिना नागरिकता के उन्हें सरकारी मदद वाले कम ब्याज दर के लोन (7a और 504 लोन) नहीं मिल पाएंगे।
होटल और मोटल इंडस्ट्री पर संकट: अमेरिका में करीब 60% मोटल्स के मालिक भारतीय-अमेरिकी (मुख्यतः गुजराती समुदाय) हैं। इनमें से कई परिवार अभी भी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं। लोन न मिलने से इनके विस्तार और नवीनीकरण (Renovation) के काम रुक जाएंगे।
पारिवारिक व्यवसायों में हिस्सेदारी का मुद्दा: यदि किसी बिज़नेस में पिता नागरिक है लेकिन बेटे के पास ग्रीन कार्ड है और उसकी 1% भी हिस्सेदारी है, तो वह बिज़नेस अब लोन के लिए अपात्र हो जाएगा। यह पारिवारिक व्यवसायों के ढांचे को बदलने पर मजबूर करेगा।
पूंजी की लागत में वृद्धि: SBA लोन न मिलने पर इन उद्यमियों को निजी बैंकों या निजी लैंडर्स के पास जाना होगा, जहाँ ब्याज दरें बहुत अधिक होती हैं। इससे उनके बिज़नेस की लाभप्रदता (Profitability) कम हो जाएगी।
भारतीय समुदाय के लिए चुनौतियां
नागरिकता के लिए जल्दबाजी: इस नियम के बाद ग्रीन कार्ड धारकों पर जल्द से जल्द अमेरिकी नागरिकता लेने का दबाव बढ़ेगा, जिससे भारत के साथ उनके 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) संबंधों पर भी मानसिक और कानूनी प्रभाव पड़ सकता है। प्रतिभा का पलायन (Reverse Brain Drain): यदि अमेरिका में व्यापार करना कठिन होता है, तो कई कुशल भारतीय उद्यमी कनाडा या वापस भारत का रुख कर सकते हैं, जहाँ स्टार्टअप्स के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है।
