India- US Trade Deal 2026: युवाओं को मिलेगी नौकरी, मगर तेल की कीमतों में लग सकती है आग, जानिए डील के प्रभावों के बारे में
punjabkesari.in Saturday, Feb 07, 2026 - 05:45 PM (IST)
India- US Trade Deal 2026: शनिवार को भारत और अमेरिका ने एक 'ऐतिहासिक' अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर प्रभावी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जबकि कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इसे 0% कर दिया गया है। आइए जानते हैं दोनों देशों के बीच हुई इस डील के कुछ Postive और negative Impact-
सकारात्मक प्रभाव (Positive Impacts):
- 0% टैक्स का धमाका: स्मार्टफोन, जेनेरिक दवाएं (फार्मा), विमान के पुर्जे और तराशे हुए हीरों पर अमेरिका ने 0 टैरिफ लागू किया है। इससे भारतीय निर्यातक सीधे तौर पर अमेरिकी बाजार में चीन और वियतनाम को पछाड़ सकेंगे।
- प्रतिस्पर्धा में बढ़त: भारतीय सामानों पर 18% टैरिफ होने से वे चीन (35% टैरिफ) और वियतनाम (20%) के मुकाबले अमेरिकी स्टोर में सस्ते बिकेंगे। इससे भारत के MSMEs (लघु उद्योगों) को भारी लाभ होगा।
- रोजगार का सृजन: कपड़ा, चमड़ा, जूते और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में टैरिफ कम होने से निर्यात बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।
- किसानों की सुरक्षा: भारत ने डेयरी (दूध, पनीर), गेहूं, चावल और मक्का जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिका को कोई छूट नहीं दी है। इससे भारतीय किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हुई है।
- वैश्विक विश्वास: 30 ट्रिलियन डॉलर वाली दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (अमेरिका) द्वारा भारत को 'पसंदीदा देश' का दर्जा देने से विदेशी निवेश (FDI) की बाढ़ आ सकती है।
नकारात्मक और चुनौतीपूर्ण प्रभाव (Negative Impacts):
- रूस से तेल आयात पर संकट: इस डील की एक प्रमुख शर्त यह है कि भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद या कम करेगा और उसकी जगह महंगा अमेरिकी तेल खरीदेगा। इससे भारत के रूस के साथ पुराने रिश्तों में तनाव आ सकता है।
- महंगाई का खतरा: अगर भारत रूसी तेल की जगह महंगा अमेरिकी तेल खरीदता है, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ पड़ेगा।
- व्यापार घाटा (Trade Deficit): भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के सामान (ऊर्जा, रक्षा तकनीक आदि) खरीदने का वादा किया है। यदि हमारा निर्यात इस अनुपात में नहीं बढ़ा, तो भारत का व्यापार घाटा काफी बढ़ सकता है।
- डेटा और डिजिटल गुलामी का डर: समझौते के तहत डिजिटल ट्रेड के नियमों को उदार बनाया गया है। आशंका जताई जा रही है कि इससे अमेरिकी टेक कंपनियां (Google, Amazon) भारतीय डेटा और मार्केट पर और ज्यादा नियंत्रण पा सकती हैं, जो घरेलू स्टार्टअप्स के लिए खतरा हो सकता है।
- 18% टैरिफ का बोझ: हालांकि 50% से घटकर 18% होना बड़ी राहत है, लेकिन कपड़ा जैसे छोटे मुनाफे वाले उद्योगों के लिए 18% टैक्स अब भी एक चुनौती है। निर्यातक इसे 0-5% तक लाने की उम्मीद कर रहे थे।
