ग्लोबल इंडेक्स 2026 में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग धड़ाम; टॉप 100 से भी बाहर, US को भी नहीं मिली शीर्ष 10 में जगह
punjabkesari.in Sunday, Jul 05, 2026 - 08:00 PM (IST)
International Desk: ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत की रैंकिंग एक बार फिर गिर गई है। इस साल भारत 125वें स्थान पर पहुंच गया है, जिससे भारतीय पासपोर्ट धारकों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा सीमित हो गई है। अब भारतीय नागरिक केवल 26 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल के जरिए यात्रा कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत पिछले कुछ वर्षों में मामूली सुधार के बावजूद शीर्ष 100 देशों में जगह नहीं बना सका। वर्ष 2021 और 2023 में भारत 127वें स्थान पर था। 2025 में यह 124वें स्थान तक पहुंचा, लेकिन 2026 में फिर एक स्थान फिसलकर 125वें नंबर पर आ गया।
किन देशों से पीछे और किनसे आगे?
नई रैंकिंग में भारत नामीबिया, फिलीपींस, मोरक्को और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से पीछे है। वहीं अजरबैजान और किर्गिस्तान भारत से नीचे हैं। भारतीय पासपोर्ट धारक भूटान, नेपाल, जमैका, मकाऊ, फिलिस्तीन, ट्यूनीशिया, अंगोला और बारबाडोस सहित 26 देशों और क्षेत्रों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। हालांकि, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन और संयुक्त अरब अमीरात सहित लगभग 88 देशों में यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को पहले से वीजा लेना अनिवार्य है।
पड़ोसी देशों की स्थिति
दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति मिश्रित रही। चीन इस सूची में 104वें स्थान पर है और भारत से आगे है। वहीं, भारत अपने कई पड़ोसी देशों से बेहतर स्थिति में है
- बांग्लादेश – 166वां स्थान
- नेपाल – 164वां स्थान
- पाकिस्तान – 188वां स्थान
दुनिया के 10 सबसे ताकतवर पासपोर्ट
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में शीर्ष 10 देशों की सूची इस प्रकार है
- रैंक देश
- 1 स्वीडन
- 2 स्विट्जरलैंड
- 3 फिनलैंड
- 4 जर्मनी
- 5 डेनमार्क
- 6 नीदरलैंड्स
- 7 आयरलैंड
- 8 यूनाइटेड किंगडम
- 9 नॉर्वे
- 10 सिंगापुर
अमेरिका भी टॉप 10 से बाहर
इस वर्ष की रैंकिंग में सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि अमेरिका और फ्रांस दोनों 11वें स्थान पर रहे और शीर्ष 10 में जगह नहीं बना सके। वहीं कनाडा 13वें स्थान पर है।रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की सूची में इस बार भी यूरोपीय देशों का दबदबा देखने को मिला, जिससे वैश्विक यात्रा स्वतंत्रता के मामले में यूरोप की मजबूत स्थिति एक बार फिर साबित हुई।
