ओडिशा में DRDO ने किया SFDR टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण,भारत की मिसाइलों को मिलेगी नई ताकत
punjabkesari.in Tuesday, Feb 03, 2026 - 10:07 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए विश्व स्तर पर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अत्याधुनिक Solid Fuel Ducted Ramjet (SFDR) तकनीक का सफल उड़ान परीक्षण कर लिया है। यह परीक्षण 3 फरवरी 2026, मंगलवार सुबह करीब 10:45 बजे, ओडिशा के चांदीपुर स्थित Integrated Test Range (ITR) से किया गया।
इस सफल परीक्षण के साथ भारत अब उन गिने-चुने देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास यह उन्नत प्रोपल्शन तकनीक मौजूद है। SFDR तकनीक भविष्य की लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों, खासकर Astra Mk-3 जैसी बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलों के विकास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। यह तकनीक भारतीय वायुसेना को दुश्मन के लड़ाकू विमानों पर दूर से ही सटीक हमला करने की रणनीतिक क्षमता प्रदान करेगी।
परीक्षण के दौरान क्या-क्या रहा खास?
उड़ान परीक्षण के दौरान मिसाइल को पहले ग्राउंड बूस्टर की मदद से आवश्यक शुरुआती गति दी गई। इसके बाद नोज़ल-लेस बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोल सिस्टम समेत सभी प्रमुख सब-सिस्टम्स ने तय मानकों के अनुरूप बेहतरीन प्रदर्शन किया।
पूरे परीक्षण के दौरान उड़ान से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा बंगाल की खाड़ी में तैनात ट्रैकिंग और टेलीमेट्री सिस्टम्स के जरिए रिकॉर्ड किया गया, जिससे SFDR तकनीक की सफलता की पुष्टि हुई। DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस मिशन की लाइव मॉनिटरिंग की।
क्यों खास है SFDR तकनीक?
SFDR तकनीक पारंपरिक रॉकेट इंजन से अलग है, क्योंकि इसमें वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है। इससे मिसाइल अधिक समय तक तेज़ गति और लंबी दूरी बनाए रख सकती है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि भारत की हवाई युद्ध क्षमता, खासकर BVR कॉम्बैट में, कई गुना बढ़ जाएगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर DRDO और इससे जुड़े उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक अहम उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह देश की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगा।
वहीं DRDO के चेयरमैन और रक्षा अनुसंधान सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस मिशन में शामिल सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और सहयोगी टीमों के समर्पण और मेहनत की सराहना की।
